केदारनाथ। केदारघाटी से विशेष अनुराग रखने वाली उमा भारती को केदारनाथ मंदिर की सुरक्षा और संवारने का मौका मिला है। इसलिए इस काम को वह स्वयं अपनी देखरेख में करवा सकती हैं। उनका केदारनाथ दौरा और अधिकारियों के साथ मीटिंग इसी प्लान का हिस्सा है। मंदिर की सुरक्षा के लिए करवाए जा रहे कामों से पारिस्थितिक तंत्र और स्थानीय पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचे, इसके लिए वह विभिन्न क्षेत्र के एक्सपर्ट को साथ मेें लाई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए केदारनाथ के जीर्णोद्धार करने की बात कही थी। जबकि केदारघाटी विकास उमा के एजेंडे में पहले से रहा है। चाहे वह सत्ता में रही हो या नहीं। वर्तमान में उनके पास नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय का जिम्मा है। इसलिए उनके लिए केदारनाथ और नदी संरक्षण कार्य आसान है।
उमा भारती के साथ भारतीय वन्य जीव संस्थान के निदेशक डा. विनोद माथुर, केंद्र सरकार के उपक्रम वाटर एंड पावर कंसल्टेसी कॉओपरेशन के जीएम आरके अग्रवाल व अमित कुमार सहित अन्य एक्सपर्ट का दल है। जबकि बुधवार को एएसआई के उत्तराखंड हेड अतुल भार्गव, पर्यटन व सिंचाई सचिव और अन्य अधिकारियों को केदारनाथ बुलवाया गया है।
मंत्री के ओएसडी बीके पांडा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि मंदिर और आसपास के निर्माण, इको टूरिज्म, भवन निर्माण ऐसे किए जाएं, जिससे इकोलॉजिकल सिस्टम में छेड़छाड़ न हो। निर्माण कार्य और अन्य सुधार कार्य का इस क्षेत्र में पड़ने वाले असर पर एक्सपर्ट अपनी राय देंगे।
एक्सपर्ट की राय, प्रदेश सरकार की योजना और स्थानीय हकू-हकूधारियों की समस्याओं के आधार पर ही योजना बनेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के तालमेल से केदारनाथ पुनर्निर्माण को केंद्र सरकार गंभीरता से ले रही है।