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भाजपा को छोड़, छोटे दल शामिल

Tue, 21 Oct 2014 05:32 AM IST
Rudraprayag
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सीएम के निमंत्रण पर भाजपा नेता तो केदारनाथ सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हुए लेकिन प्रदेश के लगभग सभी छोटे राजनैतिक दलों के प्रतिनिध पहुंचे। कैबिनेट के बाद केदारनाथ स्थित सत्संग भवन में सर्वदलीय बैठक हुई। जिसमें बसपा के सरबत करीम अंसारी (विधायक), सीपीआई के समर भंडारी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष डॉ एसएन. सचान, उत्तराखंड क्रांति दल के बीडी. रतूड़ी, सीपीआई(एम) के सुरेंद्र सिंह सजवाण मौजूद थे। सभी दलों को विश्वास में लेकर सीएम द्वारा कार्य करने की सराहना की गई।
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सीएम ने बताया कि मंदिर के पीछे जिस पत्थर की वजह से मंदिर सुरक्षित रहा उसे भी पूजा का हिस्सा मानने का उपयोगी सुझाव आया है। ताकि पत्थर वहीं पर रहे। सर्वदलीय बैठक में सीएम ने बताया कि राज्य सरकार गौरीकुंड तक मोटर मार्ग को बेहतर करने के साथ ही उससे आगे पैदल मार्ग को चौड़ा व सुविधायुक्त बनाने का कार्य कर रही है।
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केदार बाबा दर्शन और जायजा
कैबिनेट से पहले मुख्यमंत्री ने केदारनाथ में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने मौजूद अधिकारियों से विकास कार्यों के संबंध में गहन चर्चा भी की। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ धाम में भगवान केदार के दर्शन भी किए। मुख्यमंत्री ने तीर्थ पुरोहितों, हक-हकूक धारियों अन्य लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं भी सुनी। सीएम ने मंदिर के आसपास के निर्माण का जिम्मा कमेटी पर छोड़ दिया है। उनका कहना है कि जीएसआई को विश्वास में लेकर जैसा कमेटी कहेगी उसके लिए सरकार संसाधन देने को तैयार है।
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रामबाड़ा के साथ केदारनाथ में भी स्मृति स्थल
कैबिनेट की बैठक से पहले आपदा में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। केदारनाथ की विधायक शैलारानी रावत ने सीएम से कहा कि रामबाड़ा के साथ ही केदारनाथ में भी स्मृति स्थल बनाया जाए। जिस पर सीएम ने जमीन तलाशने के निर्देश दिए हैं। विधायिका ने बनाए जाने वाले दो वैकल्पिक मार्गों में सराय बनाने की भी मांग रखी। जिस पर सीएम ने वन विभाग को निर्देश दिए हैं।
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सुरेंद्र राकेश को छोड़ पूरी कैबिनेट
परिवहन एवं समाज कल्याण मंत्री सुरेंद्र राकेश को छोड़कर कैबिनेट से भी मंत्री केदारनाथ में मौजूद थे। वित्त मंत्री इंदिरा ह्दयेश, राजस्व मंत्री यशपाल और श्रम मंत्री हरीश दुर्गापाल हल्द्वानी से हेलीकाप्टर से एक साथ केदारनाथ पहुंचे थे।
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15 जनवरी तक चलेगा काम
सीएम ने स्पष्ट किया केदारघाटी में पुर्ननिर्माण और पुनर्वास को लेकर चल रहे कार्य 15 जनवरी तक जारी रहेंगे। चूंकि उसके बाद वहां का मौसम स्ट्रीम पर होता है लिहाजा फिर अप्रैल में ही काम शुरू हो सकेगा। सीएम ने बताया कि केदारपुरी में करीब 670 परिवारों को बसाया जाना है जिनका वहां हक और जमीन के स्वामी हैं। उन्होंने फिर दोहराया कि न तो मंदिर के ऊपरी और न ही अगल-बगल बल्कि आबादी मंदिर के नीचे की ओर बसेगी।
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संख्या, सुरक्षा और सुविधा देंगे
सीएम का कहना है कि वैसे तो केदारघाटी के पुनर्निर्माण और पुनर्वास के लिए कैबिनेट ने तीन साल का समय तय किया है लेकिन अधिकारियों से कहा है कि दो की समय सीमा लेकर चलें। उनका कहना है कि आने वाले सालों में केदारनाथ यात्रा में पहले की तरह जितने लोग जाते थे उससे एक हजार अधिक पहुंचने पर भी व्यवस्था होगी। आपदा ने हमें जितनी भी चेतावनियां दी हैं उनका ध्यान रखेंगे। यात्रियों के बायोमैट्रिक के साथ उनके आवागमन और अन्य सुविधाओं को बेतहर इंतजाम होगा।
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मृतक आश्रितों को पर विचार
सीएम ने बताया कि आपदा में मारे गए लोगों के बेरोजगार आश्रितों को नौकरी के संबंध में चूंकि कोर्ट का फैसला विपरीत आया है बावजूद सरकार स्टडी कराकर फिर से उन्हें नौकरी देने पर विचार कर रही है। इसका प्रस्ताव कैबिनेट में लाएंगे।
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