रुद्रप्रयाग। आपदा को सात माह से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अभी तक नदियों से बस्तियों का कटाव और भूस्खलन रोकने के लिए एक भी धेला मंजूर नहीं हो पाया है। राजकीय सिंचाई विभाग की ओर से भेजे गए बाढ़ नियंत्रण योजना के तहत 80 करोड़ के इस्टीमेट शासन में पडे़ हुए हैं।
यदि समय पर बस्तियों में भू-कटाव रोकने के लिए पक्के चेकडेम नहीं बनाए गए, तो अगली बरसात में क्षेत्र के लोगों को इसका नुकसान झेलना पडे़गा। जून में आई बाढ़ और भूस्खलन से सुमाड़ी, तिलवाड़ा, सिल्ली, सौरगढ़, विजयनगर, अगस्त्यमुनि, चाका, गंगानगर, जवाहरनगर, बनियाड़ी, पुराना देवल, सौड़ी, चंद्रापुरी, गबनीगांव, भटवाड़ी सुनार, कालीमठ, सोनप्रयाग, सीतापुर, गौरीकुंड सहित अन्य कई गांवों में मंदाकिनी नदी ने जबरदस्त कहर बरपाया था। सैकड़ों नाली सिंचित- असिंचित खेती, भवन और सड़क बाढ़ में बह गए।
अभी सुमाड़ी, विजयननगर, सिल्ली, कालीमठ, जवाहरनगर और सौड़ी क्षेत्र में आवासीय भवन भू-कटाव से खतरे की जद में है। बरसात में पानी बढ़ने पर इनका टिकना मुश्किल है। यदि भू-कटाव होता है, तो नदियों का प्रवाह तबाही ला सकता है। इसलिए इन क्षेत्रों में ट्रीटमेंट आवश्यक है।
आपदा के कुछ माह बाद सिंचाई विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए चेकडेम निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये के आगणन भेजे थे, लेकिन शासन में बैठे अफसरों ने इन महत्वपूर्ण इस्टीमेटों पर गौर नहीं किया।
देहरादून में मंगलवार को बाढ़ सुरक्षा कार्यों के आगणन पर चर्चा होनी है। अलबत्ता अभी तक आगणनों को स्वीकृति नहीं मिली है। -बीएस यादव, ईई, राजकीय सिंचाई विभाग