रुद्रप्रयाग। तल्लानागपुर, केदारघाटी और केदारनाथ सहित जखोली ब्लाक को रुद्रप्रयाग से जोड़ने वाला बेलणी पुल कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। 60 वर्ष से अधिक पुराने इस पुल की कई वर्षों से मरम्मत तक नहीं हो पाई है।
जिला मुख्यालय में मंदाकिनी नदी पर बने बेलणी पुल पर आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इस पुल से दो तरफा सैकड़ों वाहन गुजर रहे हैं। ऐसे में इस पर क्षमता से अधिक भार पड़ रहा है। पुल के निचले हिस्से के गार्डर जंग से खराब हो गए हैं। उत्तराखंड बनने से पूर्व इस पुल पर यातायात संचालन के लिए दोनों तरफ एक-एक गार्ड तैनात रहता था। तब, एक समय में पुल से एक ही वाहन गुजरता था, लेकिन आज, यहां पुल पर आए दिन वाहनों की लंबी कतार आम बात हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन, प्रशासन को कई बार अवगत कराने पर भी सुध नहीं ली जा रही है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर अन्य मोटर पुलों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर घोलतीर में तल्लानागपुर के कोठगी, भटवाड़ी, छिनका, मदोला, निरवाली, धारकोट, कोटी, क्वीली, कुरझण आदि गांवों को जोड़ने के लिए अलकनंदा नदी पर बना झूला पुल देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुका है। पुल के कई नट निकल चुके हैं, जिससे यह काफी तिरछा हो गया है। ऐसे में यहां कभी भी कोई हादसा हो सकता है। ग्राम प्रधान सविता भंडारी, बीरेंद्र सिंह नेगी, मनोज कंडारी, सत्यपाल सिंह नेगी, राकेश राणा आदि का कहना है कि पुल की मरम्मत को लेकर बीडीसी व तहसील दिवस में कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन लोक निर्माण विभाग द्वारा मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
वर्षों से हो रहा पुलों का इंतजार
जून 2013 की आपदा में बहे आठ झूला पुलों में मात्र तीन का ही निर्माण हो पाया है। विजयनगर, चंद्रापुरी पुल का निर्माण पौने पांच वर्ष में भी पूरा नहीं हो पाया है। वहीं, स्यासूं, रेल, और विद्यापीठ में पुल का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इधर, गंगतल में चाका, बडोली सहित सिलगढ़ पट्टी के गांवों को गौरीकुंड हाईवे से जोड़ने के लिए एक वर्ष पूर्व बने पुल के दोनों तरफ एप्रोच मार्ग नहीं बन पाया है। यही स्थिति भीरी-परकंडी-कंडारा मार्ग पर भी बनी है। यहां वर्ष 2015 से पुल का कार्य ठप है। डेस्क स्लैब के अभाव में वाहन गदेरे से होकर गुजर रहे हैं।
इनका कहना है --
विजयनगर में पुल का निर्माण मई माह तक पूरा कर दिया जाएगा। गंगतल में एप्रोच मार्ग के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। घोलतीर झूला पुल की मरम्मत के लिए बजट की कमी बनी हुई है।
- इंद्रजीत बोस, अधिशासी अभियंता लोनिवि रुद्रप्रयाग