तिलवाड़ा। ऑल वेदर रोड परियोजना में भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रभावितों ने उच्च न्यायालय की शरण ली है। तिलवाड़ा में एनएच द्वारा प्रभावितों को भेजे गए नोटिस के बाद से भू-स्वामी, भवन स्वामी और दुकानदर परेशान हैं। उनका कहना है कि 12 मीटर भूमि अधिग्रहण को लेकर बनी सहमति के बावजूद प्रशासन द्वारा 24 मीटर भूमि अधिग्रहित किए जाने के नोटिस भेजे गए हैं, जो अनुचित है।
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण में तिलवाड़ा कस्बा व्यापक रूप से प्रभावित हो रहा है। यहां अधिकांश परिवारों के व्यापारिक और आवासीय भवन चौड़ीकरण की चपेट में आ रहे हैं। कस्बे में हाईवे के चौड़ीकरण के लिए ऊपरी तरफ कटिंग होनी हैं। ऐसे में यहां लोगों की भूमि को एनएच द्वारा अधिग्रहित कर मुआवजा प्रक्रिया के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। बीते दो दिनों में कई परिवारों और व्यवसायियों को नोटिस मिले हैं, इससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। प्रभावितों ने तहसील प्रशासन और लोक निर्माण विभाग राजमार्ग निर्माण खंड पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहले 12 मीटर भूमि अधिग्रहित करने की बात कही गई थी, लेकिन अब उन्हें 24 मीटर भूमि अधिग्रहित किए जाने के नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससेे लोगों में संशय बना हुआ है। कहना है कि भूमि के अनुरूप लोगों को मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। दुकान टूटने से कस्बे के कई व्यापारी बेरोजगार हो जाएंगे। इधर, ऑल वेदर रोड संघर्ष समिति के संयोजक विक्रम कंडारी, व्यापार संघ अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद सकलानी, व्यवसायी बलवंत रावत ने प्रशासन द्वारा भेजे गए नोटिस के विरोध में हाईकोर्ट की शरण ली है। उनका कहना है कि बिना विश्वास में लिए भूमि अधिग्रहित करने की कार्रवाई की गई है, मुआवजा प्रक्रिया में भी कई खामियां हैं। जिलाधिकारी/सक्षम अर्जन अधिकारी तीर्थ पाल सिंह ने बताया कि केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्रालय के निर्देशों के तहत राजस्व पुलिस के सहयोग से ऑल वेदर रोड परियोजना के निर्माण के लिए बदरीनाथ और केदारनाथ हाईवे के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहित की गई है।