रुद्रप्रयाग। टिहरी की सीमा पर बसे रुद्रप्रयाग जिले की छह ग्राम पंचायतें राज्य निर्माण के 17 वर्ष में भी विकास की धारा में शामिल नहीं हो पाई हैं। सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को ब्लॉक और तहसील स्तरीय कार्यों के लिए एकतरफा 115 किमी की दौड़ लगानी पड़ रही है। यहां के जन प्रतिनिधियों और जरूरतमंदों को अपने तहसील और ब्लॉक स्तरीय कार्यों के लिए एक दिन पहले घरों से निकल रुद्रप्रयाग और तिलवाड़ा में रात गुजारनी पड़ती है।
वर्ष 1997 में टिहरी जिले से बने रुद्रप्रयाग जिले में शामिल की गईं 30 से अधिक ग्राम पंचायतों में से पश्चिमी भरदार पट्टी के भ्यूंता, खरगेड, चौंडा-सिराई, सेरा, बांसी और स्यारी को आज तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंक सुविधाओं के लिए, जहां इन गांवों के नौनिहाल और जरूरतमंद ग्रामीण 40 किमी का सफर कर श्रीनगर पहुंच रहे हैं।
वहीं, स्थायी निवास, आय और जाति प्रमाण पत्र सहित भूमि की रजिस्ट्री और अन्य तहसील और ब्लॉक स्तरीय कार्यों के लिए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को श्रीनगर से रुद्रप्रयाग होकर 115 किमी की दौड़ लगाकर जखोली पहुंचना पड़ रहा है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य कमला देवी, ग्राम प्रधान सुषमा देवी, रामेश्वरी देवी, तेज सिंह धनई, पूर्व प्रधान केएस पुंडीर का कहना है कि दस वर्ष से वे धद्दी-सेरा-बांसी सड़क को बड़ियार-सौंराखाल मार्ग से लिंक करने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सुध लेने वाला कोई हैं, जबकि दोनों मार्गों के जुड़ने से सभी छह गांवों की जखोली से दूरी आधी हो जाती। शासन, प्रशासन और विभागीय अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। इन भौगोलिक विषमताओं के कारण गांवों को न तो सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है और ना ही कोई अधिकारी-नेता यहां पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने मार्गो को जल्द लिंक कराने की मांग की है।
इनका कहना है -
विधानसभा सभा के दूरस्थ भ्यूंता, खरगेड सहित पश्चिमी भरदार के अन्य गांवों की लंबित सड़कों का निर्माण और विस्तार प्राथमिकता से किया जाएगा। इस संबंध में कार्यदायी संस्थाओं से जानकारी ली जा रही है। गांवों तक जरूरी सुुविधाएं पहुंचे, इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। - भरत सिंह चौधरी, विधायक रुद्रप्रयाग