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वन भूमि हस्तांतरण में लेटलतीफी से 273 योजनाएं प्रभावित

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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद सड़क नेटवर्क तीन हजार किमी से बढ़कर करीब 28 हजार किमी बढ़ गया है। बावजूद रुद्रप्रयाग जनपद में फॉरेस्ट एक्ट के चलते जहां कई योजनाएं फाइलों में धूल फांक रही हैं, वहीं कई वर्षों से अधर में लटकी पड़ी हैं, जिसका खामियाजा सैकड़ों गांवों के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
सेंचुरी एरिया में बसे जनपद के दूरस्थ गौंडार, तोषी, चौमासी, ब्यूंखी, स्यासूंगढ़, बुरूआ सहित 13 ग्राम पंचायतें सड़क संचार और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं से महरूम हैं। इन गांवों में पेयजल लाइनों का निर्माण तक नहीं हो पाया है। गौंडार, तोषी और चिलौंड गांव को सड़क से जोड़ने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा चुका है। वनाधिनियम के चलते भटवाडी-अथोली-जाखाल, भरदार बैंड-घरियाण, तिलवाडा-जाखाल, नौली बैंड-नोली गांव, बरगाली-पावजगपुडा-मक्कू, बांसवाडा-किरोई-जलई-गैर-कण्डारा, जाल बैंड-चिलौंड, शिवानंदी-सिमतोली सहित 107 मोटर मार्गों का निर्माण अधर में है।
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यहीं नहीं, बुरूआ गांव की पेयजल योजना को 5 वर्ष से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। कई मोटर मार्ग ऐसे हैं, जिन्हें स्वीकृति मिले 15 से 20 वर्ष हो चुके हैं। इधर, वनाधिनियम व भूमि हस्तांतरण के मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड रुद्रप्रयाग और ऊखीमठ डिविजन को लंबित मामलों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई को कहा। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को भी जरूरी निर्देश दिए हैं। इस मौके पर प्रभारी अधिकारी देवानंद, अधिशासी अभियंता इंद्रजीत बोस, मनोज दास व अन्य मौजूद थे।
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