ऊखीमठ। दो वर्ष पूर्व अतिवृष्टि से प्रभावित तुंगनाथ घाटी के उषाड़ा गांव की सुरक्षा को लेकर शासन, प्रशासन द्वारा आज तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इन दिनों हो रही बरसात से यहां ग्रामीण डरे-सहमे हुए हैं।
23 मई 2016 को उषाड़ा गांव के सरद्वारों, कठाणी और ताला तोक में बादल फटने से 4 गोशालाएं ध्वस्त हो गई थी। जबकि ग्रामीणों की 500 से अधिक कृषि भूमि भी अतिवृष्टि के सैलाब में नष्ट हो गई थी। गांव के नीचे बह रही आकाशकामिनी नदी का बहाव से तेज भू-कटाव हो रहा है, जिससे दो तरफा खतरा बना हुआ है। प्रभावित क्षेत्र से 10 परिवार अन्यत्र बस गए हैं। जबकि 70 से अधिक परिवार अब भी खतरे के साए में जीने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान लखमा देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रताप सिंह बजवाल, विक्रम बजवाल, महिपाल सिंह बजवाल ने बताया कि अतिवृष्टि से गांव के बीचों-बीच तीन जगहों पर गहरी दरारें पड़ गई थी, जिनकी आज तक मरम्मत नहीं हो पाई है। बरसाती गदेरे के दोनों तरफ भी सिंचाई विभाग द्वारा चेकडैम नहीं बनाए गए हैं। तहसील व जिला प्रशासन ने भी प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया था। तब, त्वरित सुरक्षा इंतजामों की बात कही गई थी, लेकिन दो वर्ष बाद भी हाल नही बदला। एसडीएम गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि आपदा प्रभावित उषाड़ा गांव में होने वाले सुरक्षा कार्यों के बारे में संबंधित विभागों से जानकारी मांगी गई है।