मानसून से पूर्व हो रही बारिश से अब तक जिले में जलसंस्थान की 40 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। ऐसे में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। विभाग ने मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए 110 लाख रुपये का इस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया है।
प्री मानसून के तहत 23 मई से अब तक जिले में अलग-अलग स्थानों पर हुई मूसलाधार बारिश और अतिवृष्टि से तीनों ब्लाकों के एक सौ से अधिक गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है। इन गांवों की 40 छोटी-बड़ी पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। स्थिति यह है कि मवाणगांव, जगोठ, मखोली, पंदरोला, त्यूंखर आदि गांवों के ग्रामीण गाड़-गदेरों का गंदीला पानी पीने को मजबूर हैं। अन्य गांवों के लोग दो से तीन किमी दूर प्राकृतिक स्रोतों से पानी जुटा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग केेेअवगत कराने के बाद भी सुध नहीं ली गई है। दूसरी तरफ पेयजल लाइन के क्षतिग्रस्त होने से गदेरा का दूषित पानी पीने से नागजगई, फेेगू सहित अन्य गांवों के 28 लोग बीते सप्ताह बीमार हो गए थे।
जल संस्थान की योजनाएं - 293
नगरीय पेयजल योजना - 04
ग्रामीण योजनाएं - 289
क्षतिग्रस्त योजनाएं ब्लाकवार
जखोली - 13
अगस्त्यमुनि - 15
ऊखीमठ -12
बारिश और अतिवृष्टि से तीनों ब्लाकों में नगरीय व ग्रामीण 40 योजनाएं व्यापक रूप से प्रभावित हुई हैं। इससे सप्लाई ठप है। योजनाओं की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए शासन को 110 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया गया है।- सत्येंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान रुद्रप्रयाग।