ज्योर्तिपीठ और शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने सोमवार को कोटेश्वर शिवालय में जगद्गुरु शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज की कुशलक्षेम पूछी और उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना की। दोनों शंकराचार्यों की 37 वर्षों बाद यह भेंट हुई है।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज अपने भक्तों के साथ कोटेश्वर पहुंचे। यहां से विशेष कुर्सी की मदद से वे पैदल मार्ग से मंदिर पहुंचे और शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज से मिले।
उन्होंने शंकराचार्य जी से कहा कि ‘हमारे मन में आपके प्रति कोई द्वेष नहीं है, जो था, वह बीता कल था, आप भारतवर्ष के महान संतों में एक हैं। मानव धर्म के नाते मैं यहां पहुंचा हूं और आपके जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं।’
इसके उपरांत पत्रकार वार्ता में शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के कैराना में हो रहे पलायन और जेएनयू के कन्हैया के मामले पर चिंता जताई। कहा कि माधवाश्रम जी से उनका कोई बैर नहीं है। वर्ष 1979 के बाद आज पहली बार उनकी भेंट हो रही है।
दोनों का उद्देश्य है विश्व का कल्याण हो। उन्होंने कहा कि वेद, पुराण, रामायण और महाभारत को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए और प्रभु श्रीराम के चित्र स्कूलों में लगाए जाए। कहा कि भौतिकवाद के दौर में नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है, जो चिंता का विषय है। शासन स्तर पर इस दिशा में ठोस प्रयास हो। प्राथमिक स्तर से बच्चों को वेद, पुराण के बारे में बताया जाए।
शंकराचार्य जी ने कहा कि गंगा जल को बेचना अनुचित है। गंगाजल अमूल्य है, उसका मूल्य तय नहीं हो सकता है। सरकार आमजन तक गंगाजल पहुंचाना चाहती है तो शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराए। देश में पेयजल संकट त्रासदी का रूप ले रहा है, जो आने वाले समय में और विकट हो सकता है।
‘मोदी की यात्राओं पर न हो टीका-टिप्पणी’
ज्योर्तिपीठाधीश्वर स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राएं देश हित में हैं। प्रधानमंत्री की यात्राओं पर टीका-टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। यहां भक्तों से मिलने के बाद पत्रकारों से वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि जोशीमठ का नाम आदिकाल में ज्योर्तिमठ था।
यहां का नाम पुन: ज्योर्तिमठ रखने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत से भेंट की गई, तो उन्होंने शीघ्र इस ओर सकारात्मक कदम उठाने की बात कही है। शंकराचार्य ने कहा कि गंगा के साथ ही भागीरथी और अन्य सहायक नदियों की भी वृहद साफ-सफाई की योजना बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वे ही ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य हैं। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए स्वयं को यहां का शंकराचार्य बता रहे हैं, जो गलत है। इससे पूर्व देर शाम शंकराचार्य के जोशीमठ पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया।
उन्हें गांधी मैदान से ज्योर्तिमठ तक पालकी में ले जाया गया। यहां स्थानीय श्रद्घालुओं ने शंकराचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर प्रकाश भंडारी, सुरेंद्र दिक्षित, नायब तहसीलदार चंद्रशेखर वशिष्ठ आदि मौजूद थे।
मठ-मंदिरों को बचाएं : स्वामी वासुदेवानंद
शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज सोमवार को हरिद्वार लौट गए हैं। उन्होंने पीपलकोटी स्थित विश्व हिंदू परिषद कार्यालय में कुछ देर विश्राम किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों को छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध हाट गांव के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि मठ-मंदिरों को बचाने के लिए सभी को आगे आना चाहिए। छोटी काशी का अपना अलग ही धार्मिक महत्व है। इसका संरक्षण अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बिल्व वन में निर्माण कार्य नहीं होने चाहिए। इस दौरान विहिप के जिला मंत्री राजेंद्र हटवाल, अतुल शाह, सुखदेव नेगी, नरेंद्र सिंह, एकल विद्यालय परिवार के लोग मौजूद थे। ब्यूरो