मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी से नष्ट हुई रवि की फसलों का एक वर्ष बाद भी 443 गांवों के 34 हजार से अधिक काश्तकारों को मुआवजा नहीं मिल पाया है।
मार्च-अप्रैल 2015 में जिले में 4612.074 हेक्टेयर भूमि पर बोई गई गेहूं, सरसों, जौ, मटर सहित अन्य रवि की फसलें ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई थी।
इससे 681 गांवों के 47 हजार काश्तकार प्रभावित हुए थे। सरकार ने राजस्व विभाग से सर्वे कराकर प्रभावितों को एसडीआरएफ व सीएमआरएफ में मुआवजा की घोषणा की थी। राजस्व विभाग ने क्षति आकलन पर शासन को 8 करोड़, 32 लाख, 96 हजार, 719 रुपये का प्रस्ताव भेजा था। इसके सापेक्ष मात्र 2 करोड़, 81 लाख, 72 हजार 4 सौ रुपये प्राप्त हुए, जो रुद्रप्रयाग, ऊखीमठ, जखोली और बसुकेदार तहसील के 238 गांवों में 21017 काश्तकारों को बांटा गया। कांडा, सिमतोली, शिवनंदी, सारी, मदोला, कोठगी, छिनका, तुंगनाथ घाटी के करोखी, दिलमी, सारी, रौडू, दैड़ा, हुड्डू, ऊषाड़ा, बरंगडाली, ग्वाड़, मक्कूमठ, पाऊंजगपुरा सहित 443 गांवों के 34 हजार से अधिक काश्तकार मुआवजे से वंचित रह गए। काश्तकारों का कहना है कि बीते दो वर्षो से गांवों में कृृषि पर निर्भर परिवारों की स्थिति बदहाल होकर रह गई है।
राजस्व विभाग के माध्यम से आकलन कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी, जिस पर जो पैसा प्राप्त हुआ था, वह प्रभावित काश्तकारों को बांट दिया गया है। वंचित गांवों व काश्तकारों की संख्या के साथ शासन को पुन: प्रस्ताव भेजा गया है।- राहुल कुमार गोयल, एडीएम रुद्रप्रयाग