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भारतीयों को संस्कृत का महत्व समझना होगा : सेमवाल

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गुप्तकाशी। जनपदीय संस्कृत सम्मेलन में संस्कृत के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया। इस मौके पर महिला मंगल दलों और स्कूली छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
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कार्यक्रम का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य वाचस्पति सेमवाल ने किया। कहा कि संस्कृत प्राचीन भाषा है, जो सभी भाषाओं की जननी है। जब इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मन, अमेरिका जैसे विकसित देश भी अपने बच्चों को संस्कृत पढ़ाने के लिए अग्रसर हो रहे हैं, ऐसे में हम सभी को भी संस्कृत भाषा के महत्व को समझते हुए इसे अपनाने चाहिए। संस्कृत भारती के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख डा. बीडी शर्मा ने कहा कि संस्कृत भारतीय जनमानस की भाषा है, जो संस्कारवान बनाती है। संयोजक डा. संजू प्रसाद ध्यानी, राजेंद्र भंडारी, कालिदास जन्मस्थली न्यास के संयोजक सुरेशानंद गौड, संस्कृत शिक्षाविद सर्वेश भट्ट आदि ने संस्कृत भाषा के विभिन्न पक्षों पर विचार व्यक्त किए। सम्मेलन में संस्कृत भाषा में भजन की प्रस्तुतियों के लिए विश्वनाथ संकीर्तन मंडली और ममंद नाला को सम्मानित किया गया। साथ ही विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा संस्कृत में समूहगान, भाषण और नाटक का मंचन किया गया। इस मौके पर देवानंद सेमवाल, मनोज बेंजवाल, राकेश जमलोकी, आरके बगवाड़ी, हर्षवर्धन शुक्ला, अरुण पुरोहित, अजय भट्ट, बीना गौड़, दीपक नवानी आदि मौजूद थे।
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