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शीतकाल के लिए आज बंद होंगे भगवान केदारनाथ के कपाट

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उत्तरकाशी/रुद्रप्रयाग/बड़कोट। अन्नकूट पर्व पर शुक्रवार को 11.40 पर विधि विधान से गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं, जबकि शनिवार को भैया दूज के मौके पर केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट भी बंद कर दिए जाएंगे।
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शुक्रवार को गंगोत्री से मां गंगा की भोग मूर्ति को डोली यात्रा के साथ तीर्थ पुरोहितों के गांव मुखबा के लिए रवाना किया गया। शनिवार को गंगा की मूर्ति मुखबा स्थित मंदिर में स्थापित की जाएगी। शुक्रवार सुबह गंगा का अभिषेक करने के साथ ही गंगा लहरी, गंगा सहस्त्रनाम पाठ किया गया। गंगोत्री मंदिर में श्रद्धालुओं ने अखंड ज्योति के दर्शन किए। तय मुहूर्त 11.40 पर गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। इसके बाद गंगा की भोग मूर्ति को डोली यात्रा के साथ मुखबा के लिए रवाना किया गया। पांच ग्रेनेडियर के पाइप बैंड और ढोल-दमाऊं की अगुवाई में डोली यात्रा भैरोंघाटी होते हुए रात्रि विश्राम के लिए चंडी देवी मंदिर पहुंची। शनिवार सुबह गंगा की उत्सव डोली मुखबा गांव जाएगी।
उधर, भगवान शिव के 11वें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट शनिवार को भैया दूज के मौके पर लग्नानुसार सुबह 8 बजकर 20 मिनट पर बंद कर दिए जाएंगे।
शनिवार को कपाट बंद होने से पूर्व मुख्य पुजारी बागेश लिंग बाबा केदार की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को समाधि रूप देते हुए विशेष पूजा के साथ लिंग को भस्म से ढक दिया जाएगा। इसके बाद बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति का श्रृंगार कर चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया जाएगा। इसके बाद बाबा केदार की मूर्ति मंदिर परिसर में रखी जाएगी। यहां पर अन्य धार्मिक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए प्रशासन और बीकेटीसी के अधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद कर चाबी उप जिलाधिकारी ऊखीमठ को सौंप दी जाएगी।
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इसके बाद बाबा केदार की डोली मंदिर की तीन परिक्रमा कर श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान कर रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग में भक्तों को आशीष देते हुए रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी। 22 अक्तूबर को डोली रामपुर से विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। 23 अक्तूबर को बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान होगी। यहां पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। अगले छह माह तक भक्त यहीं बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।
वहीं, यमुनोत्री धाम के कपाट भी भैयादूज पर शनिवार को शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। मां यमुना की उत्सव डोली को दुल्हन की तरह सजाकर ढोल नगाड़ों और शंख ध्वनि के साथ खरसाली ले जाया जाएगा। मां यमुना के कपाट अक्षय तृतीया के दिन खुले थे। यमुनोत्री धाम में सूर्य कुंड के गर्म पानी में श्रद्धालु प्रसाद के रूप में चावल और आलू पकाकर घर ले जाते हैं। यहां पर महिला और पुरुषों के लिए दो स्नान कुंड हैं।

श्रद्धालुओं के लिए लगाया गया निशुल्क मेडिकल कैंप
उत्तरकाशी। गंगोत्री में सेना की पांच ग्रेनेडियर की ओर से श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क मेडिकल कैंप व भंडारे का आयोजन किया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष मुकेश सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि शनिवार को गंगा की भोग मूर्ति को मुखबा स्थित गंगा मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाएगा। शीतकाल में यहां आने वाले श्रद्धालु मुखबा में ही गंगा के दर्शन एवं पूजा-अर्चना का पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे। इस मौके पर गंगोत्री विधायक गोपाल रावत, ब्लॉक प्रमुख चंदन पंवार, एसडीएम भटवाडी देवेंद्र सिंह नेगी, गंगा पुरोहित के अध्यक्ष पवन सेमवाल, तीर्थ पुरोहित सुधांशु सेमवाल आदि मौजूद थे।
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