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2019 में अपने वास्तविक स्वरूप में दिखेगा गौरीकुंड का तप्तकुंड

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रुद्रप्रयाग। वर्ष 2019 में गौरीकुंड के तप्तकुंड को अपना वास्तविक स्वरूप मिल जाएगा। इस प्राचीन धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए शासन से एक करोड़ 95 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। निर्माण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई है। कार्य अक्तूबर माह से शुरू होने की उम्मीद है।
केदारनाथ आपदा के करीब पौने पांच वर्ष बाद प्रदेश सरकार द्वारा गौरीकुंड के तप्तकुंड की सुध ली गई है। वर्षभर गर्म पानी के इस प्राकृतिक स्रोत के संरक्षण और आपदा से पूर्व के स्वरूप को देने के लिए शासन स्तर पर कार्यों की रूपरेखा तय कर सिंचाई विभाग को सौंप दी गई है। गौरीकुंड में तप्तकुंड का संरक्षण कर इसे चारों तरफ से सुरक्षित किया जाएगा। इस धार्मिक व प्राचीन धरोहर को मूल स्वरूप (आपदा से पूर्व) में लाया जाएगा। कुंड के चारों तरफ पार्क का निर्माण कर बेंच लगाई जाएंगी, साथ ही महिला व पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग चेंजिंग रूम का निर्माण किया जाएगा। गौरी माई मंदिर के समीप आपदा से ध्वस्त हुए पितृ कुंड को भी संवारा जाएगा। ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी, वन पंचायत सरपंच नरोत्तम प्रसाद गोस्वामी, पूर्व प्रधान मायाराम गोस्वामी, कुलानंद गोस्वामी का कहना है कि वे आपदा के बाद से गर्मकुंड के संरक्षण की मांग करते आ रहे हैं। सरकार ने अब सुध ली है। अब यथाशीघ्र निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए।
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विदित हो कि 16/17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा में गौरीकुंड स्थित तप्तकुंड पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। कुंड का गर्म पानी जमीन में रिसने लगा था, जिसे प्लास्टिक के पाइप से जरिए नदी किनारे पहुंचाकर संरक्षित करने का प्रयास किया गया। श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा भी वाडिया संस्थान के विशेषज्ञों से तप्तकुंड के संरक्षण के लिए मदद मांगी गई। तब, संस्थान के विशेषज्ञों ने यहां पहुंचकर गर्म पानी के सैंपल लिए थे और क्षेत्र का भू-गर्भीय सर्वेक्षण कर स्रोत को सुरक्षित बताते हुए गर्म पानी के कई स्रोत होने की बात भी कही थी।
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इनका कहना है --
गौरीकुंड के तप्तकुंड व पितृ कुंड को उसके मूल स्वरूप में लाने सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए शासन से 195 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वर्तमान में गौरीकुंड में मंदाकिनी नदी किनारे सुरक्षा दीवार व अन्य कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों के पूरा होने के बाद ही तप्तकुंड व पितृकुंड के संरक्षण का कार्य शुरू होगा। आगामी 2019 की यात्रा में श्रद्धालुओं प्राचीन कुंडों को मूल स्वरूप में देख सकेंगे।
---- डीएस पुंडीर, ईई सिंचाई विभाग, केदारनाथ डिवीजन, रुद्रप्रयाग
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