अगस्त्यमुनि। तृतीय केदार तुंगनाथ धाम से अपने मायके पहुंची मां नंदा देवी के दर्शनों के लिए भणज गांव में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कुल देवी की पूजा-अर्चना कर ग्रामीणों ने परिवार सहित आराध्य का आशीर्वाद प्राप्त किया। अब, छह दिन तक मां भगवती नंदा देवी गांव में भी विश्राम करेंगी। इसी के साथ नंदा कौथिग का भी शुभारंभ हुआ।
बृहस्पतिवार को मां भगवती की रूप छड़ी व शिव-पार्वती की उत्सव मूर्ति भक्तों की जयकारों के बीच तुंगनाथ से चोपता, बनियाकुंड, चल्याखोड़, सौर-भूतनाथ होते हुए देर शाम को अपने मायके भणज गांव पहुंची। यहां बाजार में क्यूंजा घाटी के सैकड़ों ग्रामीणों ने आराध्य देवी के दर्शन किए। इस मौके पर कई ध्याणियां भावुक हो गई। बाद में, जयकारों के बीच पुजारियों द्वारा देवी नंदा व बाबा तुंगनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हुए अन्य धार्मिक औपचारिकताओं के साथ रूप छड़ी और उत्सव मूर्ति को मूल स्थान पर स्थापित किया गया। इस अवसर पर कई पश्वाओं पर देवता अवतरित भी हुए। इससे पूर्व राजकीय इंटर कालेज में विधायक मनोज रावत ने नंदा देवी कौथिग का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर स्कूली बच्चों की खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। साथ ही भाषण, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता भी हुई। विधायक रावत ने कहा कि यह आयोजन क्यूंजा घाटी सहित रुद्रप्रयाग जनपद की प्राचीन संस्कृति का प्रतीक है। इसके संरक्षण व प्रचार-प्रसार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। इस मौके पर कौथिग समिति के अध्यक्ष व ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह रावत, उपाध्यक्ष रजपाल भारती, क्षेत्र पंचायत सदस्य अमरा देवी आदि ने बताया कि पांच वर्ष बाद आयोजित हो रहे इस धार्मिक व सांस्कृतिक अनुष्ठान में महिला व युवक मंगल दलों द्वारा विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही उद्यान व कृषि विभाग द्वारा स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को विभागीय जानकारी दी जाएगी। 18 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस आयोजन में ध्याणियों को विशेष आमंत्रित किया गया है। इस मौके पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व ग्रामीण मौजूद थे।