रुद्रप्रयाग। गर्भवती महिला आशा देवी की मौत के मामले में सीनियर गाइनोकोलॉजिस्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बीते 3 जुलाई को महिला को जिला चिकित्सालय से गंभीर हालत में रेफर किया गया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर द्वारा 5 घंटे तक गर्भवती महिला की कोई देखभाल नहीं की गई थी।
मजिस्ट्रेटियल जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग की सीनियर गाइनोकोलॉजिस्ट डा. अर्चना वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए थे, जिसके बाद बृहस्पतिवार शाम सीनियर गाइनोकोलॉजिस्ट पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मजिस्ट्रेटियल जांच रिपोर्ट में डा. वर्मा द्वारा गर्भवती की जांच नहीं करने और समय पर महिला को रेफर नहीं करने की बात सामने आई है। यहां तक कि सहायक डा. प्रांजलि थापा द्वारा भी बिना सीनियर डॉ. की राय के गर्भवती को गंभीर हालत में हायर सेंटर रेफर किया गया। एसडीएम सदर देवानंद ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि जिला चिकित्सालय में गर्भवती महिला के भर्ती होने से रेफर किए जाने तक सीनियर डाक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा घोर लापरवाही बरती है, जिस कारण गर्भवती की मौत हुई। गर्भवती को भर्ती करने के बाद उसके परिवार के साथ प्रसव को लेकर नियमानुसार लिखित सहमति भी नहीं ली गई थी। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्भवती महिला को जिस एंबुलेंस में हायर सेंटर रेफर किया गया था, उसमें जरूरी उपकरण नहीं थे। महिला को रुद्रप्रयाग से श्रीकोट तक उचित उपचार नहीं मिल पाया। इधर, पुलिस अधीक्षक पीएन मीणा ने बताया डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।