रुद्रपुर। जिले में रफ्तार का कहर लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। तमाम जागरूकता अभियान, सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशों और चेकिंग अभियान के बावजूद हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सात वर्षों में दुर्घटना का आंकड़ा जहां 2474 तक जा पहुंचा, वहीं मौतों की संख्या 1631 तक पहुंच गई है। आलम यह है कि तीन दिनों के भीतर ही हादसों में दो बच्चों सहित 11 लोग जान गंवा चुके हैं। हादसों को रोकने के लिए तमाम प्रयास धरे ही रह जा रहे हैं।
दरअसल अपराधों के साथ ही यूएसनगर हादसों के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है। हर साल हादसों में सैकड़ों लोग जान गंवाते हैं। हादसों को लेकर पुलिस विभाग के साथ ही डीएम की अध्यक्षता में गठित सड़क सुरक्षा समिति भी ब्लैक स्पॉट चिह्नित करने के साथ ही तमाम कवायदें करती रहती हैं। इसके अलावा स्कूलों में जागरुकता अभियान चलाने के साथ ही बोर्ड भी लगाए गए हैं। जिले में 72 डेंजर जोन चिन्हित कर बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
दुर्घटना संभावित जगहों पर कॉन्वेक्स मिरर भी लगाए जा चुके हैं। बावजूद इसके हादसों में कमी नहीं आ पा रही है। ठंड की सीजन और कोहरा पड़ने की वजह से भी हादसों के सिलसिले शुुरु हो गए हैं। इसके अलावा ओवरलोडिंग के साथ ही वाहनों की रफ्तार भी हादसों की बड़ी वजह है। जल्दी पहुंचने के चलते वाहनों की रफ्तार बढ़ाना जानलेवा साबित हो रहा है। सात वर्षों में हुए हादसों में 1799 लोग घायल हो चुके हैं। इनमें कई लोग को दिव्यांग भी हो चुके हैं।
पुलिस की ओर से तमाम चेकिंग अभियान के बावजूद ओवरलोडिंग से हादसों की संख्या कम नहीं हो पा रही है। हादसों के बढ़ते आंकड़ों न सिर्फ चिंताजनक है बल्कि पुलिस प्रशासन के हादसे रोकने की कवायदों पर भी सवालिया प्रश्न भी हैं। एसपी ट्रैफिक प्रमोद कुमार ने बताया कि जिले में 40 संवेदनशील जगहों पर कॉन्वेक्स मिरर लगाए जा चुके हैं जबकि सात और लगाए जाने हैं। कुल 72 डेंजर जोन में चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
सात वर्षों में हादसों की स्थिति
वर्ष हादसों की संख्या मृतकों की संख्या घायलों की संख्या
2013 346 219 237
2014 373 233 251
2015 349 254 236
2016 379 253 278
2017 362 251 262
2018 356 226 260
2019 (तीन दिसंबर तक) 309 195 275
सर्दी के मौसम में कोहरा पड़ने से विजिबिलिटी कम हो जाती है। हादसे से बचाव के लिए वाहन चालक रफ्तार पर नियंत्रण रखें। वाहनों में रिफ्लेक्टर लगाएं और डिपर का प्रयोग करें। समय से घर से निकलें, ताकि गाड़ी तेज नहीं चलानी पड़े। हादसों को रोकने के लिए ओवरलोडेड वाहनों के साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। - बरिंदरजीत सिंह, एसएसपी।
विशेष आख्या रिपोर्ट भेजने में हीलाहवाली, जवाब तलब
रुद्रपुर। जिले में हो रहे हादसों को लेकर यातायात निदेशालय ने दो या दो से अधिक मौतों वाली घटनाओं की हर महीने विशेष आख्या रिपोर्ट (एसआर) तलब की थी लेकिन जिले के हर महीने के बजाय एक साथ नौ महीने की रिपोर्ट निदेशालय को भेजी गई है। इस पर निदेशालय ने नाराजगी जताई है। निदेशक केवल खुराना ने बताया कि हर महीने एसआर नहीं भेजने से साफ है कि हादसों को लेकर अधिकारी संजीदा नहीं है। दूसरे महीने की रिपोर्ट के साथ ही 10 महीने की रिपोर्ट कुछ दिन पहले ही जिले से मिली है, लिहाजा एसआर भेजने में लापरवाही को लेकर जिले से जवाब तलब किया गया है। इसके अलावा ट्रैफिक सुधार में दिए गए बजट को किस चीजों और गतिविधियों में खर्च किया जा रहा है, इस पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।
ओवरस्पीड और ओवरलोडिंग के बाद कार्रवाई क्यों
रुद्रपुर। सड़कों में अक्सर हादसे ओवरलोडिंग, ओवरस्पीड और ड्रिंक एंड ड्राइव की वजह से होते हैं। हादसों के बाद चालक और वाहन पर कार्रवाई अमल में लाई जाती है। अब इस ओर यातायात निदेशालय का ध्यान गया है। निदेशक केवल खुराना ने बताया कि हर हादसे के बाद ही ओवरलोडिंग और ओवरस्पीड में कार्रवाई होती है। देहरादून, यूएसनगर, नैनीताल और हरिद्वार जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है कि हादसों को रोकने के लिए पहले से ऐसे वाहनों पर कार्रवाई क्यों अमल में नहीं लाई जाती है। ओवरलोडेड डंपर क्यों सड़क पर दौड़ रहे हैं, जो हादसे की वजह बन रहे हैं। कहा कि हादसों का बढ़ना चिंताजनक है। हादसों को लेकर अब जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
अधूरी सड़कें भी बन रही हादसों की वजह
रुद्रपुर। एनएच के अधूरे निर्माण भी हादसों को दावत दे रहे हैं। एनएच-74 में कई जगहों पर निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इसके अलावा एनएच-87 में भी निर्माण कार्य प्रगति पर है और कुछ जगहों पर अधूरा पड़ा है। इसके अलावा सड़कों की बदहाली भी हादसों की वजह बनती है। सड़कों में गड्ढे कई बार जान पर भारी पड़ते रहे हैं। सड़कों की खराब दुर्दशा कहीं न कहीं हादसों के लिए जिम्मेदार होती है।
सड़क पर वाहन चलाते समय ध्यान रखें
- शराब पीकर वाहन कतई न चलाएं
- वाहन चलाते समय सही दिशा में चले और गति पर नियंत्रण रखें
- दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करें।
- कोहरे में इंडीकेटर का इस्तेमाल करें।
- बड़े वाहनों में रिफ्लेक्टर जरुर लगवाएं।
- गलत दिशा में वाहन न चलाएं।
- खतरनाक मोड़ों पर सावधानी बरतें।
- ओवरलोडिंग और ट्रिपल राइडिंग से बचें।