तिलवाड़ा। दो दशक पूर्व गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा जो फूड प्रोसिसिंग यूनिट स्थापित की गई थी, उसे अब बंद किया जा रहा है। इस बार काश्तकारों के उत्पादों की खरीदने के बजाय निगम द्वारा यहां तैनात कर्मचारियों को अन्यत्र शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे लोग मायूस हैं।
वर्ष 1999 में जीएमवीएन द्वारा फूड प्रोसिसिंग यूनिट स्थापित की गई थी। निगम द्वारा जखोली ब्लाक सहित जनपद के अन्य क्षेत्रों के काश्तकारों से माल्टा, संतरा, आंवला, बुरांश सहित अन्य उत्पादों की खरीद कर जूस, अचार व जैम तैयार किया जाता रहा है। ये उत्पाद तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी, ऊखीमठ, रुद्रप्रयाग आदि बाजारों में बिकते थे। लेकिन बीते दो-तीन वर्षों से फूड प्रोसिसिंग यूनिट निगम के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है, जिससे इसे अन्यत्र शिफ्ट किया जा रहा है। स्थानीय विक्रम कंडारी, जिला पंचायत सदस्य गोपाल सिंह पंवार का कहना है कि यूनिट स्थापना के लिए ग्रामीणों ने अपनी सैकड़ों नाली नाप भूमि दान दी थी, लेकिन अब गढ़वाल मंडल विकास निगम यूनिट को बंद कर रहा है। फूड प्रोसिसिंग यूनिट के प्रबंधक एलके अवस्थी का कहना है कि फल संरक्षण इकाई पिछले लंबे समय से लगातार घाटे में चल रही है, जिससे इसे पीपीपी मोड में संचालित करने पर विचार किया जा रहा है। ताकि आने वाले समय में स्थानीय लोगों के रोजगार की उम्मीद बनी रहे। काम के अभाव में यहां तैनात कर्मियों को अन्यत्र यूनिटों में भेजा जा रहा है।