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आपदा के छह वर्ष बाद पुर्नजीवित होगा रामबाड़ा-गरूडचट्टी पैदल मार्ग

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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम तक यात्रियों की पहुंच आसान हो, इसके लिए रामबाड़ा-गरुड़चट्टी पुराने पैदल मार्ग को पुनर्जीवित किया जाएगा। साढ़े पांच किमी लंबे इस मार्ग के निर्माण के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लोनिवि गुप्तकाशी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। वन भूमि हस्तांतरण के बाद मार्ग का निर्माण शुरू होगा। इस मार्ग पर यात्राकाल में घोड़ा-खच्चरों का संचालन किया जाएगा।
16/17 जून 2013 की आपदा में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग रामबाड़ा से धाम तक पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। अब इसे पुनर्जीवित करने के लिए कार्य शुरू हो गया है। वन विभाग और डीडीएमए के संयुक्त निरीक्षण के बाद इन दिनों
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वन भूमि क्षेत्र में पेड़ों की गणना के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा गरुड़चट्टी से रामबाड़ा के लिए दो फीट चौड़ा पहुंच मार्ग बनाया जा रहा है। पेड़ों की गणना के बाद वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई होगी। इसके बाद साढ़े पांच किमी लंबे और पांच मीटर चौड़े मार्ग का निर्माण किया जाएगा। सब कुछ ठीक रहा और समयबद्ध कार्रवाई होती रही तो अगले वर्ष मार्च से रास्ता बनाने का कार्य शुरू हो जाएगा। इस मार्ग से यात्राकाल में घोड़ा-खच्चरों का संचालन किया जाएगा, जिससे मुख्य मार्ग पर चलने वाले यात्रियों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो। विदित हो कि मुख्य सचिव उत्पल कुमार ने बीते वर्ष प्रशासन को पुराने मार्ग को पुनर्जीवित करने के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत गरुड़चट्टी से केदारनाथ तक साढ़े तीन किमी रास्ता बन चुका है। इस मार्ग को मंदिर से लिंक करने के लिए मंदाकिनी नदी पर 60 मीटर स्पान का पुल बनाया जाना है।

आपदा में हो गया था ध्वस्त
16/17 जून 2013 की आपदा में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग रामबाड़ा से आगे धाम तक ध्वस्त हो गया था। तब 11 सितंबर को पुन: कपाट खोलने के लिए वैकल्पिक रास्ते से धाम पहुंचा गया था। मार्च 2014 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान द्वारा रामबाड़ा से मंदाकिनी नदी के दायीं तरफ केदारनाथ तक नौ किमी लंबा और छह फीट चौड़ा नया पैदल मार्ग तैयार किया गया था। इस मार्ग पर छोटी व बड़ी लिनचोली, छानी कैंप और रुद्रा प्वाइंट पड़ाव के रूप में विकसित किए गए थे। बीते पांच वर्षों से बाबा केदार की यात्रा इसी मार्ग से संचालित होती आ रही है।
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इनका कहना है --
रामबाड़ा-गरुड़चट्टी पुराने पैदल मार्ग को पुनर्जीवित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। इन दिनों पेड़ों की गणना के लिए दो किमी लंबा पहुंच मार्ग बनाया जा रहा है। इसके बाद भूमि हस्तांतरण व अन्य कार्रवाई पूरी कर साढ़े पांच किमी रास्ता बनाया जाएगा। इस मार्ग से घोड़ा-खच्चरों का संचालन किया जाएगा।
-प्रवीण कर्णवाल, अधिशासी अभियंता, डीडीएमए, गुप्तकाशी
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