फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शीतकाल के लिए बंद हुए भगवान केदारनाथ के कपाट

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
केदारनाथ/बड़कोट (उत्तरकाशी)। भगवान आशुतोष के 12 ज्योतिर्लिंगों में 11वें भगवान केदारनाथ धाम तथा यमुनोत्री धाम के कपाट शनिवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। बाबा केदार के कपाट प्रात: 8.20 बजे विधिविधान से बंद किए गए जबकि यमुनोत्री धाम के कपाट दोपहर में एक बजकर 27 मिनट पर बंद किए गए। इस मौके पर दो हजार श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए।
केदारनाथ मंदिर में शनिवार प्रात: 5 बजे से मंदिर के गर्भगृह में रावल भीमाशंकर लिंग और मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने बाबा केदार की विशेष पूजा-अर्चना की। करीब आधे घंटे तक चली पूजा के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार कर भोग लगाया गया। इसके बाद स्वयंभू लिंग को समाधि रूप देते हुए भस्म से ढककर समाधि पूजा की गई। प्रात: 6 बजे विधि-विधान के साथ गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए गए। इस मौके पर बाबा केदार की पंचमुखी मूर्ति को चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया गया। अन्य धार्मिक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए प्रात: 8.20 बजे रावल और मुख्य पुजारी ने जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल, पुलिस अधीक्षक पीएन मीणा, बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह, उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद करते हुए लाख से सील लगाई और चाबी प्रशासन को सौंपी। 8.34 बजे मंदिर की तीन परिक्रमा करने के बाद बाबा केदार की डोली ने 10-जम्मू-कश्मीर लाइट इनफैंट्री बैंड की धुनों के साथ शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया। केदारपुरी जय, केदार, हर-हर महादेव, जय भैरवनाथ के जयकारों से गूंज उठी। रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड और सोनप्रयाग होते हुए बाबा की डोली दोपहर बाद अपने पहले पड़ाव रामपुर पहुंची। यहां भक्तों और स्थानीय लोगों ने बाबा की डोली का भव्य स्वागत किया। 22 अक्तूबर को बाबा की डोली गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास करेगी। 23 को अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में अगले छह माह के लिए विराजमान होगी। अब अगले छह तक बाबा केदार की यहीं पूजा होगी।
विज्ञापन

उधर, शनिवार सुबह 9 बजे खरसाली से यमुना के भाई समेश्वर (शनि) देवता की डोली यमुनोत्री के लिए रवाना हुई। यमुनोत्री में विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 1 बजकर 27 मिनट पर यमुनोत्री मंदिर के कपाट बंद किए गए। यमुना जी की उत्सव मूर्ति को डोली यात्रा के साथ तीर्थ पुरोहितों के गांव खरसाली लाया गया, जहां ग्रामीणों ने यमुना का भव्य स्वागत किया। इस दौरान धाम में जिले की कई देव डोलियां मौजूद रहीं। इसमें राना गांव के समेश्वर देवता, ओजरी की जाख देवी, ब्रह्मखाल के नाग देवता की डोली शामिल थी। मंदिर समिति के उपाध्यक्ष जगमोहन उनियाल एवं सचिव कृतेश्वर प्रसाद ने बताया कि अब शीतकाल में खरसाली गांव में यमुना जी के दर्शन तथा पूजा-अर्चना की जाएगी। इस मौके पर डीएम डा.आशीष चौहान, एसडीएम मनुज गोयल, तीर्थ पुरोहित भागेश्वर, पवन उनियाल, पुरूषोत्तम उनियाल आदि मौजूद थे।


संबंधित खबरें
5 माह 18 दिन में पहुंचे 471235 यात्री
उत्साह, उमंग और उल्लास से सराबोर रही बाबा केदार की यात्रा
केदारनाथ।
कपाट खुलने से बंद होने तक बाबा केदार की यात्रा में उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल रहा। 5 माह 18 दिन की यात्रा के दौरान 4 लाख 71 हजार 235 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। 2013 की आपदा के बाद पहली बार रिकॉर्ड श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए।
इस वर्ष 3 मई को शुरू हुई केदारनाथ धाम की यात्रा में पहले दिन से बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दर्शन के बाद से सुरक्षित केदार, सुरक्षित उत्तराखंड का जो संदेश देश-विदेश में गया, उसने बाबा केदार की यात्रा को एक नया आयाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पहले ही दिन धाम में 9 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए, जो बीते चार का रिकॉर्ड बना। 14वें दिन में ही धाम में दर्शनार्थियों का आंकड़ा एक लाख पार हो चुका था। 25वें दिन में दो लाख श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके थे। इस वर्ष एक दिन में सर्वाधिक सोलह हजार दर्शनार्थियों का रिकॉर्ड भी बना। जून में तेज बरसात के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। सीमिति संसाधनों और सुविधाओं के बावजूद यात्रियों का उत्साह बढ़ता रहा। खराब मौसम के कारण सिर्फ दो दिन पैदल यात्रा को बंद रखना पड़ा।
जून 2013 की आपदा के बाद हाशिए पर सिमटे केदारघाटी के जनजीवन और कारोबार को इस वर्ष की यात्रा ने नई रफ्तार देने का काम भी किया। रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी, ऊखीमठ, फाटा, सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बाजारों में रौनक रही। यात्रा के सहारे केदारघाटी का कारोबार भी पटरी पर दौड़ता दिखा।
गौरीकुंड के ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी, व्यापारी मुकेश गोस्वामी, फाटा निवासी रमेश चंद्र उत्तराखंडी, व्यापार संघ अध्यक्ष एपी भट्ट, डीसी उनियाल, रामचंद्र गोस्वामी आदि का कहना है कि इस वर्ष की यात्रा में पहले दिन से ही लोगों में नई ऊर्जा दिखी।
केदारनाथ के वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा कपाट खुलने पर श्रीकेदारनाथ व श्रीबदरीनाथ धाम के दर्शन ने देश-दुनिया में यात्रा को प्रचारित-प्रसारित करने में अहम भूमिका निभाई।

बीके टीसी की भी हुई रिकॉर्ड आय
केदार धाम में इस सीजन में हुई 15 करोड़ की कमाई
अमर उजाला ब्यूरो
रुद्रप्रयाग।
बाबा केदार की यात्रा ने इस वर्ष कई नए रिकॉर्ड बनाए। इस वर्ष जहां 4 लाख 71 हजार 235 श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए, वहीं बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने भी बीते चार वर्षों का घाटा खत्म कर अपनी आमदनी का नया रिकॉर्ड बनाया। मंदिर समिति को इस वर्ष लगभग 15 करोड़ की आमदनी हुई है।
समिति की आय बढ़ाने में हेली कंपनियों की भी बड़ी भूमिका रही है। विशेष रुद्राभिषेक, महाभिषेक, शाम की आरती और मुरारी बापू की श्रीराम कथा आयोजन ने भी बीकेटीसी के खजाने को भरने में योगदान दिया।
उद्योगपति मुकेश अंबानी की ओर से बाबा केदार की अगले वर्ष की यात्रा के लिए भी 1.51 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस वर्ष के महाभिषेक में उपयोग होने वाले चंदन व केशर के लिए उन्होंने पूर्व में ही 1.20 करोड़ रुपये दो किस्तों में दिए। समिति के सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि जून 2013 की आपदा के बाद से जो आर्थिक संकट उपजा था, वह इस बार की यात्रा से पूरी तरह खत्म हो गया है। बाबा केदार की कृपा से उम्मीद से अधिक आमदनी हुई है। आगामी यात्रा में धाम सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी।

बीकेटीसी की आय का लेखाजोखा
वर्ष यात्री आमदनी (करोड़ में)
2012 583167 6
2013 312201 4
2014 40833 58 हजार
2015 154430 2.75
2016 309746 6.34
2017 389543 15


यमुनोत्री मंदिर समिति ने कमाए 33.60 लाख
अमर उजाला ब्यूरो
बड़कोट (उत्तरकाशी)
यमुनोत्री धाम में इस वर्ष आपदा के बाद रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं की आमद होने के साथ ही मंदिर समिति की आय में भी वृद्धि हुई। छह माह के इस यात्रा सीजन में यमुनोत्री धाम में 4 लाख 18 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों ने मां यमुना के दर्शन किए। दान पात्र एवं रसीद बुक से यमुनोत्री मंदिर समिति को 33.60 लाख रुपए से अधिक की आय हुई। मंदिर समिति के अध्यक्ष एसडीएम मनुज गोयल ने कहा कि समिति की आय के स्रोत बढ़ाए जाएंगे, जिससे सुविधाएं देने के प्रयास किए जाएंगे।

गुप्तकाशी में आज होगी भजन संध्या
रुद्रप्रयाग (ब्यूरो)। भगवान केदारनाथ की डोली के गुप्तकाशी पहुंचने के अवसर पर कलाकार रविवार को भजन संध्या के साथ-साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे। कला मंच के अध्यक्ष नवीन सेमवाल ने बताया कि रविवार को गुप्तकाशी में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। लोक गायक कुलदीप कप्रवाण, राकेश पंवार और मनीष लखेड़ा द्वारा धार्मिक एवं लोक गीतों की प्रस्तुतियां दी जाएगी, जबकि गीतकार अजय नौटियाल भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

मुखबा मंदिर में प्रतिष्ठित हुई गंगा
उत्तरकाशी। शुक्रवार को गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद होने के बाद चड़ी देवी मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद गंगा की डोली यात्रा मुखबा पहुंची। यहां विधि विधान एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ गंगोत्री मंदिर के प्रतिरूप मंदिर में गंगा की भोग मूर्ति को प्रतिष्ठित किया गया। अब शीतकाल में गंगा के दर्शन और पूूजा-अर्चना यहीं होगी। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल, अध्यक्ष मुकेश सेमवाल और गंगोत्री पुरोहित सभा के अध्यक्ष पवन सेमवाल ने सरकार से शीतकालीन यात्रा शुरू करने की मांग की।

शासन-प्रशासन ने कभी नहीं ली विश्वनाथ मंदिर की सुध
आशा प्रसाद सेमवाल
गुप्तकाशी। भगवान केदारनाथ की चल विग्रह डोली रविवार को रात्रि प्रवास के लिए विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। बाबा के स्वागत में विशेष कीर्तन-भजन का आयोजन भी किया जाएगा।
मान्यता है कि चार सौ वर्ष पूर्व जब केदारनाथ धाम बर्फ में ढका था, तब गुप्तकाशी में ही बाबा के दर्शन होते थे। इसलिए इस क्षेत्र को छोटा केदार के रूप में भी जाना जाता है। केदारनाथ धाम के समान ही यहां पर मंदिर के साथ अर्द्धनारीश्वर मंदिर है। साथ ही मर्णिकर्णिका जलकुंड है, जिसमें गंगा, युमना की जलधाराएं वर्षभर बहती रहती हैं। केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए जाने वाले व दर्शन कर लौटने वाले श्रद्धालु इन जलधाराओं के पवित्र जल को अपने साथ जरूर ले जाते हैं। बाबा केदार से इतना संबंध होने के बावजूद शासन- प्रशासन आज तक विश्वनाथ मंदिर की सुध नहीं ले पाया है। मर्णिकर्णिका कुंड और मंदिर पहुंच मार्ग की हालत दयनीय है। वरिष्ठ नागरिक वचन सिंह पंवार, ग्राम प्रधान मदन अग्रवाल, पूर्व प्रमुख ममता नौटियाल का कहना है कि केंद्र व राज्य सरकार जिस तरह से केदारनाथ धाम को सजा रहे हैं। उसी तरह गुप्तकाशी मंदिर की भी सुध ली जाए।
विज्ञापन

वहीं, बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह ने कहा कि विश्वनाथ मंदिर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए शासन से हमें कुछ धन प्राप्त हुुआ है। जल्द ही यहां सुधारीकरण के कार्य शुरू किए जाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें