रुद्रप्रयाग। जखोली विकासखंड के सिलगढ़ व बड़मा पट्टी के 50 गांवों के लिए वर्ष 2006-07 में स्वीकृत लस्तर वाया सिंचाई नहर का एक दशक बाद भी निर्माण नहीं होने पर डीएम ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने नहर के स्वीकृति से लेकर अभी तक हुई कार्रवाई की जांच के लिए समिति का गठन किया है। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर नहर का भविष्य तय होगा।
26 किमी लंबी सिंचाई नहर से सिलगढ़ व बड़मा के चोपड़ा, कुरछोला, नागधारकोट, पूर्वियाणा, तैला, जखनोली, टाट पाली, जैली, कंडाली, कुमडी, मुसाढुंग, जखनोली, जखोली, सिद्धसौड बडमा, थाती, मुन्ना देवल, चाका फलाटी सहित 50 गांवों को लाभ मिलना था। योजना के निर्माण के लिए शासन से 18 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। योजना की निर्माण के लिए 2 करोड़, 8 लाख में खरीदी गई सामग्री गैंठाणा, धारकुडी आदि जगहों पर जंक से नष्ट हो रहे हैं। इस बारे में अमर उजाला द्वारा बीते 6 अक्तूबर के अंक में 10 वर्ष से ‘लस्तर सिंचाई नहर का निर्माण कार्य ठप’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर का संज्ञान लेते हुए डीएम मंगेश घिल्डियाल ने स्वीकृत नहर की जानकारी के लिए एडीएम की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। यह समिति, नहर के निर्माण नहीं होने और आगामी समय में निर्माण की संभावनाओं को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी। समिति में एसडीएम जखोली, ईई लघु सिंचाई व ग्रामीण निर्माण विभाग को शामिल किया गया है। डीएम ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।