रुद्रप्रयाग। जिले के ऊंचाई वाले गांवों में भारी बर्फबारी हुई है। गुप्तकाशी में 10 वर्ष बाद बर्फ गिरी, जबकि ब्लाक मुख्यालय जखोली सहित आसपास के गांवों में पांच वर्ष बाद जमकर बर्फबारी हुई है।
सोमवार तड़के पांच बजे से जनपद में 7 हजार फीट ऊंचाई तक के गांवों व कस्बों में बर्फबारी हो रही है। दस वर्ष बाद गुप्तकाशी बाजार में भी बर्फबारी से लोगों ने जमकर आनंद लिया। भले ही तेज बारिश के चलते बर्फ पिघल गई। उधर, देवर, जाखधार, बणसू, पेंज, करोखी, देलमी, त्रियुगीनारायण, सोनप्रयाग, गौरीकुंड, गैड, मनसूना, गिरीया, गौंडार, रांसी, उनियाणा, राउंलेंक, तोषी, फाटा, सारी, देवरियाताल सहित अन्य ऊंचाई वाले गांवों और कस्बों में दो से साढ़े तीन फीट बर्फ गिर चुकी है। कालीमठ घाटी के जाल, चौमासी, चिलौंड, ब्यूंखी, कुणजेठी में भी भारी बर्फबारी हुई है। अगस्त्यमुनि ब्लाक के हरियाली डांडा सहित निचली तरफ जसोली, कोट तल्ला, मल्ला, कोदिमा आदि गांवों में बर्फबारी हुई है। ब्लाक मुख्यालय जखोली में भी पांच वर्ष बाद अच्छी बर्फबारी हुई है। इस दौरान लोगों ने बर्फ का खूब आनंद लिया। यहां बधाधीताल में दो फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है। वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. गुलाब सिंह राणा ने बताया कि जखोली सहित पालाकुराली, धनकुराली, गोर्ती, बजीरा में दस वर्ष बाद दो फीट से अधिक बर्फ जमी है। रुद्रप्रयाग-टिहरी जनपद की सीमा पर स्थित पर्यटक स्थल चिरबटिया भी बर्फ से लकदक हो चुका है। चोपता, दुगलबिट्टा में भी करीब चार फीट तक बर्फ गिरी हुई है। बर्फबारी के कारण कुंड-ऊखीमठ-चोपता-मंडल-गोपेश्वर हाईवे फिर से बंद हो गया है।
केदारनाथ में छह फीट से अधिक बर्फ जमी
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में 24 घंटे से बर्फबारी हो रही है। यहां छह फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है। दिनभर केदारपुरी में तापमान माइनस में रहा। यहां अधिकतम तापमान माइनस 10 दर्ज किया गया। एमआई-26 हेलीपैड से लेकर मंदिर और आसपास के भवनों तक जाने वाले सभी रास्ते बर्फ से ढक चुके हैं। पैदल मार्ग में भी रामबाड़ा तक भारी बर्फबारी हुई है। यहां बर्फ की मोटी-मोटी परत जम चुकी है। भैरवनाथ मंदिर, गरूड़चट्टी सहित वासुकीताल क्षेत्र में भी भारी बर्फ गिर चुकी है। धाम में पुनर्निर्माण कार्य में तैनात वुड स्टोन कंपनी के प्रभारी कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट ने बताया कि बीते दो वर्षों में यह पहला मौका है, जब धाम में एक साथ इस तेजी से बर्फ गिरी हो। जिस हिसाब से बर्फ गिरी है, मौसम सुधार होने पर उसे साफ करने में तीन दिन लग सकते हैं। तभी पुनर्निर्माण कार्य पुन: शुरू हो सकते हैं। द्वितीय केदार मद्महेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ में भी चार फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है। यहां दिनभर बर्फबारी होती रही।