रुद्रप्रयाग। गुलाबराय में आठ वर्ष तक आतंक बचाने वाले गुलदार को ढेर करने वाले शिकारी जिम कार्बेट के नाम पर यहां म्यूजियम स्थापित किया जाएगा। साथ ही रुद्रप्रयाग से जुड़े प्रसंगों पर डॉक्यूमेंट्री भी बनाई जाएगी। यहां स्थित आम के पेड़ को भी धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाएगा, जिस पर मचान बनाकर उन्होंने आमदखोर को अपनी गोली का शिकार बनाया था। यहां जिम कार्बेट के नाम पर म्यूजियम स्थापित होने से युवा पीढ़ी को उनके बारे में जानकारी मिल सकेगी। डीएम ने उप वन संरक्षण रुद्रप्रयाग वन प्रभाग और पर्यटन विभाग को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।
प्रशासन, पर्यटन व वन विभाग ने संयुक्त रूप से जिम कार्बेट पार्क को म्यूजियम के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। डीएफओ मयंक शेखर झा ने बताया कि लोग सिर्फ इतना जानते हैं कि जिम कार्बेट एक शिकारी थे, लेकिन वह, उससे अधिक पर्यावरण व प्रकृति प्रेमी थी। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं, जिसमें मैन इटनिंग लेपर्ड ऑफ रुद्रप्रयाग (रुद्रप्रयाग का आमदखोर बाघ) पुस्तक में उन्होंने 1918 से 1926 तक आतंक का प्रयास रहे आदमखोर का वर्णन किया है। उन्होंने बताया कि पार्क को वृहद रूप देकर उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उनके जन्मस्थान कालाढुंगी की तर्ज पर यहां, उनके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुओं को रखा जाएगा। डीएम मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि जिम कार्बेट ने जितना समय रुद्रप्रयाग में गुजारा और आमदखोर को मारने के लिए जो भी प्रयास किए, उस पर एक डाक्यूमेंट्री बनाई जाएगी। साथ ही म्यूजियम के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
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जिम कार्बेट का जीवन परिचय
जिम एल्डवर्ड कार्बेट 25 जुलाई 1875 को नैनीताल के कालाढुंगी में पैदा हुए थे। उन्होंने कई पुस्तकों का लेखन किया। जिम कार्बेट को रुद्रप्रयाग से विशेष लगाव था। वर्ष 1918 से 1926 तक वह यहां रहे। तब उन्होंने 60 किमी दायरे में आतंक का प्रयास रहे आदमखोर गुलदार को मारने के लिए 20 रातें बेलणी पुल पर गुजारीं, जबकि 6 रातें गुलाबराय के आम के पेड़ पर बिताईं। आखिरकार 2 मई 1926 को उन्होंने इसी मचान से गुलदार को अपनी बंदूक की गोली से ढेर कर दिया था। आजीवन अविवाहित रहने वाले जिम कार्बेट का निधन 19 अप्रैल 1955 को केन्या में हुआ था।