आराध्य मां भगवती हरियाली देवी भक्तों के साथ धनतेरस की रात में 12 किमी की पैदल यात्रा कर अपने मूल मंदिर हरियाली कांठा (हरियाल पर्वत) पहुंचीं। यहां मायके पक्ष पाबौ गांव के ग्रामीणों ने अपनी ध्याण का स्वागत किया और खीर का भोग लगाया। मंदिर में पूजा-अर्चना व हवन के बाद देवी की डोली जसोली मंदिर पहुंचीं और पूजा-अर्चना के बाद देवी की मूर्ति को गर्भगृह में विराजमान कर दिया गया। उत्तराखंड में रातभर चलने वाली यह एकलौती देवी यात्रा है।
धनतेरस को देर शाम मां हरियाली देवी की डोली ने भव्य शृंगार के बाद अपने मूल मंदिर जसोली से हरियाली कांठा के लिए प्रस्थान किया था। रातभर 12 किमी पैदल यात्रा कर मां भगवती हरियाली देवी की डोली अपने मैती भक्तों के साथ प्रभात बेला में छोटी दीपावली पर मंदिर पहुंची। इस मौके पर रानीगढ़, धनपुर, बच्छणस्यूं व अन्य क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों देवी भक्तों के जयकारों से पूरा हरियाल क्षेत्र गूंज उठा। पुजारी हरीश नौटियाल ने देवी की पूजा के साथ पंचनाम देवताओं का आह्वान किया। इस मौके पर देवी के मायके पाबौ गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने नेक भेंट अर्पित की। मां भगवती अपने पश्वा पर अवतरित हुईं और भक्तों को आशीर्वाद दिया। मंदिर परिसर में यज्ञ का आयोजन किया गया और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए आहुतियां दी गईं। इसके बाद, देवी के मैतियों ने आराध्य को गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाया और भक्तों को प्रसाद वितरित किया। सुबह 10 बजे सभी धार्मिक औपचारिकताओं के बाद आराध्य मां हरियाली देवी ने हरियाली कांठा से विदा ली और जसोली मंदिर के लिए प्रस्थान किया। इस मौके पर मैती भक्तों की आंखें नम हो गईं। देवी की डोली दोपहर बाद जसोली पहुंची। जहां पूजा-अर्चना के बीच मूर्ति को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। इस मौके पर महिलाओं ने देवी के जागर भी गाए।