बनारस के बाबा शिवानंद लगभग 117 साल की उम्र में अपने शिष्यों के साथ बदरीनाथ जैसे दुर्गम धाम की यात्रा पर निकले हैं।
बाबा शिवानंद के पासपोर्ट पर उनकी जन्मतिथि आठ अगस्त 1896 अंकित है। बाबा का जन्म बंगाल में हुआ था। बाबा इस उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ हैं।
बाबा का कहना है कि इसके पश्चात वह भारतीय शास्त्रों के अनुसार निष्काम कर्म और दीनहीन लोगों की सेवा का संदेश देने विदेश निकल जाएंगे।
बदरीनाथ यात्रा के दौरान रुद्रप्रयाग के एक आश्रम में ठहरे बाबा ने बताया कि उनका आश्रम वाराणसी स्थित कबीरनगर में है।
वह जब 23 साल के थे तो बदरी-केदार की यात्रा पर आए थे। उनकी इच्छा थी कि दोबारा भक्तों के साथ बदरीनाथ धाम की यात्रा करें। इसलिए वह भक्तों को साथ लेकर आए हैं।
35 वर्ष की उम्र से वह देश-विदेश की यात्राएं कर रहे हैं। वर्ष 1925 से 1959 तक ग्रीक, अमरीका, फ्रांस, स्पेन, हंगरी, चीन, जापान और सोवियत रूस आदि घूमते रहे।
उबला भोजन सेहत का राज
117 की आयु में भी चुस्त-दुरुस्त रहने के राज के बारे में बाबा ने बताया कि वह रात को नौ बजे सो जाते हैं और तड़के तीन बजे उठ जाते हैं। उठने के बाद वह पूजा-अर्चना करते हैं।
वह बैठने के बजाय इधर-उधर टहलकर जप करते हैं। इससे उनकी दोनों शारीरिक और आध्यात्मिक कसरत हो जाती है। बाबा फल और दूध का सेवन नहीं करते हैं। सिर्फ उबले हुए भोजन का सेवन करते हैं।