रुद्रप्रयाग। सदियों से पहाड़ और गांव महिलाओं के संरक्षण के सहारे बढ़ और संवर रहे हैं। वह, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रही हैं। इसलिए हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम महिलाओं को आत्मनिर्भर व आत्मसुरक्षित बनाने में उनका साथ दें। अपराजिता महाभियान के तहत महिला स्वरोजगार पर आयोजित संगोष्ठी में उत्तराखंड वन विभाग और बीएसएफ के ब्रांड एंबेसडर पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने यह बात कही।
अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल के तहत अगस्त्यमुनि ब्लाक के रानीगढ़ पट्टी के दूरस्थ विद्यालय राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोट तल्ला में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के लिए यह प्रयास सही समय पर किया जा रहा है। उन्होंने महिलाओं को अपने घरों के नजदीकी खेतों में चायपत्ती, नेपियर घास, तुलसी, जड़ी-बूटी व फूलोत्पादन करन के लिए कहा, जिससे वह अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकती है। पहाड़ की लोक संस्कृति में महत्वपूर्ण मालू के पत्ते को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए कोट तल्ला में जल्द ही मालू की नर्सरी स्थापित की जाएगी। पर्यावरणविद् जंगली ने कहा कि महिलाओं की मदद से 15 दिन में इस पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमर उजाला का यह महाभियान महिला सशक्तिकरण के लिए मील का पत्थर का साबित होगा। मां नंदा महिला उत्थान समिति के संस्थापक सुभाष पुरोहित ने स्थानीय संसाधनों व उत्पादों के सहारे गांवों में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास पर जोर दिया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दिनेश सिंह चौधरी ने कहा कि अमर उजाला का यह प्रयास दूरस्थ गांवों में महिलाओं को जागरूक करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। वहीं वयोवृद्ध अकबर सिंह ने कहा जनजागरूकता की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके अलावा पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. आशीष अंथवाल ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभावान महिलाओं व बेटियों को नया आयाम हासिल होगा। ज्योति नेगी ने कहा कि महिलाएं मानसिक व बौद्धिक रूप से मजबूत हैं। हमें उन्हें उनके अधिकारों व समाज के विकास में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करना होगा। सहायक अभियंता अनिल कुमार ने कहा कि मातृशक्ति के बिना समाज की कल्पना बेमानी है। इस दौरान बच्चों ने भी पारंपरिक नृत्य व गीत प्रस्तुत किए। समारोह का संचालन प्रधानाध्यापक सत्येंद्र सिंह भंडारी ने किया। इस मौके पर शिक्षक जसवीर सिंह चौहान, प्रीतम सिंह, ऊषा देवी, आरती चौधरी, अनीता देवी, बसंती देवी, ललिता देवी, कमला देवी, मंजू देवी, सुनीता देवी, उर्मिला देवी, सुमेदा देवी, देवेश्वरी देवी, अमर सिंह, बलवीर सिंह, राजेंद्र सिंह, सौरभ सिंह, नागेंद्र सिंह, रमन सिंह, अनीता देवी, पूजा देवी, रजनी देवी, शशि देवी, गीता देवी सहित स्कूली बच्चे मौजूद थे।
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जंगली सूअर खेती को चौपट कर रहे हैं। शाम ढलते ही जानवर घरों के आंगन में पहुंच रहे हैं, जिससे जानमाल के नुकसान का खतरा बना हुआ है। इसलिए गांवों में खेती में बदलाव के साथ अन्य रोजगारपकर कार्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे महिलाओं का सामाजिक व आर्थिक विकास हो सके।
-- जयंती देवी, ग्रामीण कोट तल्ला
बेटियों की शिक्षा को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। अगर, बेटियों की पढ़ाई अच्छी होगी तो वे आने वाले कल में जिम्मेदार महिला की भूमिका अच्छी तरह से निभा सकेंगी। अमर उजाला का यह प्रयास दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं व बेटियों के लिए एक नई उम्मीद बना है।
-- करीना, छात्रा/निवासी कोट तल्ला
गांवों में खेती निरंतर बंजर हो रही है। ऐसे में महिलाओं को पारंपरिक खेती के साथ फूल व फलोत्पादन के लिए समय-समय पर प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। साथ ही जलवायु के हिसाब से उन्हें अन्य नगदी फसलों की जानकारी दी जाए।
-- कूमा देवी, ग्रामीण, निवासी कोट तल्ला
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का जीवन जल, जंगल और जमीन के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है। ऐसे में उन्हें इन्हीं संसाधनों के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास होने चाहिए।
-- ऊषा देवी, भोजन माता, राप्रावि कोट तल्ला
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