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10 वर्ष बाद रुद्रप्रयाग में फिर सता में लौटी कांग्रेस

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रुद्रप्रयाग। नगर पालिका रुद्रप्रयाग में कांग्रेस को 10 वर्ष बाद जीत मिली है, जिसने पार्टी में नया जोश भर दिया है।
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पहले दिन से पार्टी के युवा ब्रिगेड ने एकजुट होकर कार्य किया है। भले ही पार्टी को अन्य तीनों नगर पंचायत सीटों पर करारी हार झेलनी पड़ी है, जिससे विधायक मनोज रावत और जिलाध्यक्ष ईश्वर सिंह बिष्ट की प्रतिष्ठा पर असर पड़ा है।
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वर्ष 2008 और 2013 में कांग्रेस पार्टी को नगर पालिका में हार का सामना करना पड़ा था। साथ ही 2014 के विस चुनाव में भी रुद्रप्रयाग विस से पार्टी की हार ने संगठन को छितरा सा दिया था, लेकिन निकाय चुनाव में पालिकाध्यक्ष की सीट पर जीत ने पार्टी में नया जोश भर दिया है। टिकट आवंटन के दिन से पार्टी के युवा ब्रिगेड ने प्रत्याशी के लिए जिस एकजुटता से कार्य किया, उसी का परिणाम है कि पार्टी को जोरदार जीत मिली है। इस जीत के साथ कांग्रेस ने नगर पालिका रुद्रप्रयाग में 563 मतों से विजयी होने का नया रिकार्ड अपने नाम किया है। जीत का सबसे बड़ा श्रेय जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी राणा को जाता है, जिन्होंने टिकट के लिए प्रत्याशी की पुरजोर पैरवी की थी। साथ ही पूर्व पालिकाध्यक्ष देवेंद्र झिक्वांण की रणनीति रही। तमाम अटकलों व कयासों के बीच मिली इस जीत से कार्यकर्ता गदगद हैं। प्रभारी योगंबर सिंह नेगी ने बताया कि जिस रणनीति के साथ कार्य किया गया था, वह सफल रही। सातों वार्डों पर उम्मीद के मुताबिक मत मिले हैं। दूसरी तरफ नगर पंचायत ऊखीमठ में अध्यक्ष की सीट गंवाने के साथ ही तिलवाड़ा व अगस्त्यमुनि में खराब प्रदर्शन ने कांग्रेस विधायक मनोज रावत और जिलाध्यक्ष ईश्वर सिंह बिष्ट की प्रतिष्ठा को प्रभावित किया है। बताया जा रहा है कि संगठन द्वारा यहां ध्यान नहीं दिया गया, जिस कारण हार मिली। इधर, जिला पंचायत अध्यक्ष का कहना है कि उन्हें नगर पालिका सीट की जिम्मेदारी मिली थी, जिसे उन्होंने पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ निभाया है।
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