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संस्कृत गूढ़ ज्ञान का भंड़ार और संस्कारों की भाषा है: चौधरी

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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से महाभारत के युद्ध में भीम द्वारा दुर्योधन की जंघा तोड़ने की लीला पर आधारित संस्कृत नाटिका ऊरूभंगम का मंचन किया गया। पात्रों के शानदार अभिनय व संवाद अदायगी ने दर्शकों को बांधे रखा।
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रुद्रप्रयाग में नगर पालिका के बारात घर में आयोजित कार्यक्रम में गढ़वाल विवि श्रीनगर कला संस्कृति एवं निस्पादन केंद्र के डा. अजीत पंवार व दिनेश भट्ट के निर्देशन व जय प्रकाश राणा के संगीत में महाभारत के अंतिम अंश भीम-दुर्योधन पर आधारित महाकवि भास प्रणीत ऊरूभंगम नाटक का मंचन किया गया। भीम द्वारा दुर्योधन की जंघा तोड़ने के बाद महाकवि भास ने दुर्योधन के मुंह से सात्विक कर्म करना, मिलकर रहना, सभी को अपना समझना आदि विचारों को प्रकट कराया है। इससे पूर्व नाटक का शुभारंभ विधायक भरत सिंह चौधरी ने किया। कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। यह गूढ़ ज्ञान का भंडार है, जो संस्कारों की भाषा भी है। यह भाषा समाज को एकसूत्र में पिरोने में भी अहम भूमिका निभाएगी। सरकार द्वितीय राजभाषा के उत्थान के लिए और स्थायी पहल करेगी। पालिकाध्यक्ष राकेश नौटियाल ने कहा कि संस्कृत के संरक्षण से ही अन्य भाषा व बोलियां भी समृद्ध होंगी। अकादमी के शोध अधिकारी एवं संस्कृत नाटक यात्रा के संयोजक डा. हरीश चंद्र गुरूरानी ने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए संस्कृत नाटकों के साथ-साथ अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बताया कि देहरादून, ऋषिकेश, नई टिहरी, कर्णप्रयाग, स्याल्दे, काशीपुर और हरिद्वार में ये कार्यक्रम किए जाएंगे। इस मौके पर उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के पूर्व सचिव डा. सुरेश चरण बहुगुणा, सीएमओ डा. सरोज नैथानी , किशोरी लाल रतूड़ी, भानु प्रकाश देवली, प्रेम मोहन डोभाल, ओम प्रकाश सेमवाल, जगदंबा चमोला, जेपी गौड़, प्रवीण सती, अशोक चौधरी, डीपी नौटियाल एमएन मैंदुली, दीपक नौटियाल, एसपी सिलोडी आदि मौजूद थे।
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