रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के ग्रीन एंबेसडर एवं पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली का कहना है, कि केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण में उपयोग में लाई जा रही भारी मशीनों के प्रयोग से वहां का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मध्य हिमालय में बढ़ रहे मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम करने के लिए सख्त कानून बनाने की पैरवी भी की।
नमामि गंगे अभियान के तहत निम की ओर से गोमुख में आयोजित सम्मेलन से लौटते हुए रुद्रप्रयाग में अमर उजाला के साथ बातचीत में उत्तराखंड के ग्रीन एंबेसडर एवं पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने कहा कि केदारनाथ से गोमुख तक जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिख रहा है। पर्याप्त बर्फ के अभाव में मध्य हिमालय के पहाड़ दरक रहे हैं, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ रहा है। कहा कि बीते वर्षों में वनाग्नि की घटनाओं के बढ़ने का असर मध्य हिमालय पर पड़ा है। बताया कि, 50 वर्ष में गोमुख में काफी परिवर्तन आया है। बताया कि पहाड़ियों पर कार्बन अधिक जमने से मौसम पर असर पड़ रहा है। इस वर्ष जुलाई माह में गोमुख में आई बाढ़ से वहां कई मीटर ऊंचे मलबे के ढेर हैं, जिससे भागीरथी नदी का बहाव क्षेत्र में भी बदल गया है, जो चिंताजनक है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा, कि यही स्थिति केदारनाथ धाम में भी देखने को मिल रही है।