महिला कल्याण विभाग में बजट की कमी के कारण गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। विभाग के खाते में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध न होने के कारण हरिद्वार, कलियर, रोशनाबाद और रुड़की स्थित चाइल्ड हेल्प डेस्क पर कार्यरत 32 कर्मचारियों का अप्रैल व मई माह का वेतन अटक गया है। लगातार दो महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों में निराशा और चिंता का माहौल है। अप्रैल में 134 केस हुए हैं और मई में 50 से अधिक केस पर चाइल्ड हेल्प डेस्क काम कर चुका है।
महिला बाल कल्याण विभाग के अंतर्गत जिले में चार चाइल्ड हेल्प डेस्क बने हैं। 32 कर्मचारी चाइल्ड हेल्प डेस्क के माध्यम से बच्चों और जरूरतमंदों को सहायता प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वेतन न मिलने से उनके सामने परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक खर्चों को पूरा करने जैसी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन न मिलने से आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
बजट संकट से विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। वेतन भुगतान के साथ-साथ बजट की कमी का असर विभागीय कार्यों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। चाइल्ड हेल्प डेस्क के रखरखाव, स्टेशनरी की व्यवस्था और अन्य आवश्यक गतिविधियों के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। संसाधनों के अभाव में फील्ड वर्क भी प्रभावित होने लगा है जिससे बच्चों और महिलाओं से जुड़े मामलों के निस्तारण पर असर पड़ सकता है।
दबी जुबान में जानकारों का कहना है कि यदि जल्द ही विभाग को आवश्यक बजट उपलब्ध नहीं कराया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कर्मचारियों ने शासन और विभागीय अधिकारियों से जल्द धनराशि जारी कर वेतन भुगतान करने की मांग की है। जिला समन्वय अधिकारी (चाइल्ड हेल्प डेस्क) अनुज सैनी का कहना है कि उच्च अधिकारियों को वेतन जारी करने के संबंध में पत्राचार किया जा चुका है। उम्मीद है दो-चार दिन में वेतन जारी कर दिया जाएगा।
कहां कितने कर्मचारी
रुड़की-6
हरिद्वार-12
कलियर-6
रोशनाबाद-8