रुड़की। मतदान की तारीख नजदीक आते ही चुनाव प्रचार जोर पकड़ता जा रहा है। अब चुनावी समर में प्रत्याशियों के साथ ही उनकी पत्नी और अन्य परिजन भी मैदान में उतर आए हैं। एक ओर जहां पुरुषों की टोली वोट मांग रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं की टोली जनसंपर्क में जुटी हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी सियासी घमासान छिड़ा हुआ है।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में मतदान की तारीख नजदीक आते ही प्रचार में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी हुई है। इसके लिए प्रत्याशियों के अलावा महिलाओं और युवाओं की अलग-अलग टोली बनाई गई है, जो घरों और बाजारों में जनसंपर्क कर अपनेे प्रत्याशियों के लिए वोट मांग रहे हैं। प्रत्याशियों की ओर से मतदाताओं को लुभाने के लिए हर तरकीब अपनाई जा रही है। इस बार शहर में ई-रिक्शा प्रचार के प्रमुख माध्यम बने हुए हैं। इसके अलावा व्हाट्सएप और फेसबुक पर सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर अपने प्रचार-प्रसार के साथ ही विरोधियों पर जमकर निशाना साधा जा रहा है। प्रत्याशियों की ओर से एक दूसरे के समर्थकों में सेंधमारी के भी हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। देखना है कि 15 फरवरी को होने वाले मतदान में किसका प्रचार भारी पड़ता है और जनता किसके वादे और दावों पर भरोसा जताती है।
महिला शक्ति के सहारे जीत के दावे
लक्सर(ब्यूरो)। विधानसभा चुनाव में ऐसी महिलाएं प्रचार करतीं नजर आ रही हैं, जिनका दूर-दूर तक राजनीति से कोई वास्ता नहीं है। इसके पीछे जहां प्रत्याशी इन्हें मैदान में उतारकर प्रत्याशी महिला शक्ति के समर्थन का दावा कर रहे हैं, वहीं इन महिलाओं को गाड़ी में घूमने के साथ-साथ खाने-पीने व मेहनतनामा भी दिया जा रहा है।
प्रदेश में चुनावी शोर जेार पकड़ता जा रहा है। प्रत्याशी चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद पूरी शक्ति के साथ प्रचार में जुटे हुए हैं। इसके लिए प्रत्याशी, चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिए सभी हथकंडे अपना रहे हैं। इसके तहत अब महिलाओं को भी चुनाव प्रचार में उतारा गया है। खास बात यह है कि अधिकांश महिलाओं का चुनाव से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें तो प्रचार के लिए गाड़ी, खाना पीना व प्रतिदिन 300 रुपये मेहनताना दिया जा रहा है। एक गांव में जब इन महिलाओं से पार्टी में किस पद पर होने का सवाल किया गया तो इनके पास कोई जवाब नहीं था, जिसके बाद ये चुपचाप चली गईं।
मंगलौर में चुनावी हलचल तेज
मंगलौर(ब्यूरो)। नगर में चुनावी हलचल तेज हो गई है। सभी प्रत्याशी गली मुहल्लों में बैठकें कर समर्थन जुटाने में लगे हैं। बैठकों में शामिल होने के लिए समर्थक डीजे और ढोल के साथ जुलूस निकाल रहें है, जिनके लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति भी नहीं ली जा रही है।
विधान सभा के चुनाव के मतदान के लिए अब महज नौ दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में प्रत्याशियों की हलचल काफी बढ़ गई है। अब प्रत्याशी गली मोहल्लों में नुक्कड़ सभाएं कर रहे हैं। इन सभाओं में शामिल होने के लिए समर्थक जुलूस की शक्ल में जा रहे हैं। ढोल व डीजे की धुनों पर डांस करते समर्थक नारेबाजी करते हुए सभाओं में शामिल हो रहे हैं। मजेदार बात यह है कि इन जुलूसों के लिए किसी तरह की अनुमति नहीं ली जा रही है, जबकि नियमानुसार ऐसा करना जरूरी है।