जेल में बंद महिला बंदियों को छूटने के बाद उनको अपराध की दुनिया से दूर मुख्यधारा में लाने के लिए उनको हुनरमंद बनाया गया है। जेल में बंद महिला बंदियों ने एक माह के प्रशिक्षण में सिलाई, कढ़ाई से लेकर बैग बनाने तक का हुनर सीख लिया है। जेल में बंद चार महिला बंदी छूटने के बाद आत्मनिर्भर बन गई हैं। वह घर पर ही रहकर सिलाई और कढ़ाई का काम कर रही हैं। अब परिवार के लोगों को इन महिलाओं के हुनर पर नाज है।
लॉकडाउन के समय ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल की ओर से महिला बंदियों को हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम शुरू की गई थी। इसके चलते जेल में बंद 21 महिला बंदियों को सिलाई, कढ़ाई, मास्क बनाने और बैग बनाने का एक माह तक प्रशिक्षण दिया गया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल और जेल प्रशासन की ओर से शुरू की गई मुहिम रंग लाई और महिला बंदी सिलाई, कढ़ाई और बैग बनाने में एक्सपर्ट बन गई। इसी बीच 21 महिला बंदियों में से चार महिला बंदी जेल से छूटकर बाहर आ गई। उन्होंने प्रशिक्षण का लाभ उठाते हुए घर पर ही सिलाई, कढ़ाई का काम शुरू कर दिया। इन महिलाओं ने अब अपने परिवार के पोषण की जिम्मेदारी स्वयं संभाल ली है। जबकि जेल में बंद 17 महिला बंदी जेल के अंदर हैं। जिन्हें जेल से बाहर आने का इंतजार है। जेल प्रशासन की मानें तो महिला बंदी सिलाई, कढ़ाई में पूरी तरह परिपक्व हो चुकी हैं। महिला बंदियों का कहना है कि वह जेल से बाहर आने के बाद स्वयं का रोजगार करेंगी।
इसलिए इन्हें किया किया हुनरमंद
जेल में बंद महिला बंदी जब रिहा होती हैं तो उनके हाथों में कोई हुनर नहीं रहता है, इसलिए या तो वह पुन: अपराध की तरफ बढ़ जाते हैं या फिर मेहनत-मजदूरी कर अपना व परिवार का पेट भरती हैं। इसलिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल और जेल प्रशासन की पहल पर उन्हें हुनरमंद बनाया गया है ताकि वह जेल से बाहर निकलते ही अपना रोजगार शुरू कर सकें और अपराध से दूर हो जाएं।
महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जेल में सिलाई, कढ़ाई और बैग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। ताकि वह जेल से बाहर आकर किसी पर निर्भर न रहें और आत्मनिर्भर बनकर अपना रोजगार शुरू करें।
...नमामी बंसल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, रुड़की