आखिरकार जिस जर्जर पुल को ठीक कराने की जिम्मेदारी रेलवे विभाग लोक निर्माण विभाग पर डालता आ रहा था। उसे शुक्रवार को रेलवे विभाग ने खुद बनवा डाला। यही नहीं जर्जर पिलरों और गार्डर को बदलने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। रेलवे विभाग लोनिवि से मिले 79 लाख से पिलर और गार्डर बदलेगा। वहीं पुल को अब भी भारी वाहनों के गुजरने से खतरा बना हुआ है।
अमर उजाला ने 18 दिसंबर को लंढौरा में रेलवे लाइन के ऊपर बने जर्जर हो चुके पुल की खबर को प्रमुखता से उठाया था। जिसमें बताया गया था कि रेलवे विभाग ने लोक निर्माण विभाग के द्वारा पुल की मरम्मत नहीं कराए जाने पर पुल मार्ग को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है। साथ ही इस मामले में लोनिवि के अधिकारियों ने यह कहते हुए मरम्मत करने से साफ इंकार कर दिया था कि यह संपत्ति रेलवे विभाग की है तो मरम्मत की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है। फिलहाल निष्कर्ष यह निकला कि रेलवे के ऊपर बने पुल के मरम्मत की जिम्मेदारी दोनों ही विभागों की है। क्योंकि लोनिवि ने छह माह पूर्व पुल की मरम्मत के लिए रेलवे को 79 लाख रुपये जारी किए थे। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने पर रेलवे विभाग ने इसकी सुध ली और शुक्रवार को पुल की खस्ताहाल सड़क को दुरुस्त कर दिया लेकिन, अभी भी पुल के गार्डर और पिलर जर्जर हालत में हैं। रेलवे अधिकारी भी मानते हैं कि यह पुल भारी वाहनों के चलने लायक नहीं है। रेलवे विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिलर और गार्डर बदलने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुरादाबाद मंडल में संबंधित कार्य को शुरू करने के लिए ड्राइंग मिलने का इंतजार किया जा रहा है। जल्द इसका काम शुरू करा दिया जाएगा।
पहले मांगे थे दो करोड़ रुपये, मिले 79 लाख
बताया गया है कि इस पुल की मरम्मत के लिए रेलवे विभाग ने लोनिवि से दो करोड़ 10 लाख रुपये की डिमांड की थी लेकिन, लोनिवि ने इस रकम को देने से मना कर दिया था। उसके बाद कार्य में संशोधन कर डिमांड भेजी गई। इस पर लोनिवि ने करीब छह माह पूर्व रेलवे विभाग को 79 लाख रुपये जारी कर दिए थे।
लोनिवि की ओर से 79 लाख रुपये दिए गए हैं। इसके तहत पुल की सड़क ठीक कराई गई है। जल्द पिलर व गार्डर आदि का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए ड्राइंग आदि फाइनल करने का काम चल रहा है। फिलहाल पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध है।
-एसएस रावत, निर्माण निरीक्षक