स्थानीय रोडवेज बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं का बुरा हाल है। बस स्टैंड परिसर में बना सार्वजनिक शौचालय का ताला कई दिनों से बंद है जिससे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और वृद्धों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर चालक-परिचालक बसों को अंदर लाने के बजाय हाईवे पर ही रोक रहे हैं जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
मंगलौर बस स्टैंड से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री दिल्ली, हरिद्वार, रुड़की और सहारनपुर के लिए आवागमन करते हैं। बस स्टैंड परिसर में यात्रियों की सुविधा के लिए शौचालय का निर्माण किया गया था लेकिन देखरेख के अभाव या प्रशासनिक लापरवाही के कारण इस पर ताला लटका हुआ है। दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को मजबूरी में खुले में जाना पड़ रहा है या फिर आसपास के होटलों की शरण लेनी पड़ रही है।
यात्रियों की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि रोडवेज बसें स्टैंड के भीतर प्रवेश नहीं कर रही है। चालक अपनी सुविधा के अनुसार बसों को सर्विस रोड या मुख्य हाईवे पर ही रोककर सवारियां उतार और चढ़ा रहे हैं। यात्री धूप और धूल के बीच सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करने के लिए मजबूर है। हाईवे पर बसों के रुकने से न केवल ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है बल्कि यात्रियों की जान पर भी बन आती है।
तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर बस पकड़ना किसी जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने कई बार इसकी शिकायत परिवहन निगम के अधिकारियों से की है लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही शौचालय का ताला नहीं खुलवाया और बसों का अंदर आना अनिवार्य नहीं किया तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। यात्रियों ने परिवहन निगम के उच्चाधिकारियों से इस अव्यवस्था पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।
मंगलौर बस अड्डे के रखरखाव और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था देखना नगर पालिका का कार्य है। पालिका को इस संबंध में पत्र भी लिखा गया है। एक कर्मचारी प्रदीप भी वहां पर डिपो की व्यवस्था देख रहे हैं। यदि वहां कोई कमी है तो उसको दुरुस्त कराया जाएगा। -अमिता सैनी, सहायक महाप्रबंधक