दो साल पहले नाकाम हुई सीपीयू को फिर से शहर की सड़कों पर उतार दिया गया है। इन पर बिना किसी विवाद के यातायात नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी होगी। बृहस्पतिवार को सीपीयू में एक इंस्पेक्टर, 11 सब इंस्पेक्टर और 20 कांस्टेबल ने कमान संभाली और विभिन्न चौराहों पर लोगों को हैलमेट पहनकर वाहन चलने की ताकीद की। इससे चौराहों पर अफरातफरी का माहौल रहा।
शहर में यातायात नियमों का पालन करने के लिए सीपीयू की टीम तैनात कर दी गई है। सीओ स्वप्न किशोर स्वरूप ने बताया कि अभी एक सप्ताह तक: कोई चालान नहीं काटे जाएंगे। पहले लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया जाएगा। उसके बाद यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान काटे जाएंगे। सीपीयू टीम की कमान इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह के हाथों में होगी। सीओ और एसपी देहात भी सीपीयू को कमांड करेंगे। बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे सीपीयू के जवान विभिन्न चौराहों पर बिना हेलमैट पहनकर वाहन चलाने वालों को रोका और उन्हें हेलमैट पहनकर वाहन चलने की सलाह दी। सीपीयू ने अभियान की शुरूआत बोट क्लब से हुई। सीपीयू जवानों ने जब बोट क्लब पर वाहनों को रोकना शुरू किया तो चालकों में अफरातफरी मची गई। चालान के डर से लोग चौराहे से लौटकर भागने लगे, लेकिन जब लोगों को हकीकत पता चली तो राहत की सांस ली।
जाम से नहीं मिलेगी निजात, बस कटेगा चालान
शहर में सीपीयू से शहर की यातायात व्यवस्था सुधरने की उम्मीद कम है। क्योंकि सीपीयू के जवानों को ज्यादातर फोकस बिना वाहनों के कागजों की चेकिंग और बिना हैलमेट चलने वाले लोगों के चालान तक सीमित रहेगा। बृहस्पतिवार को भी इसका एक नमूना देखने को मिला। दोपहर 12 बजे सीपीयू ने बोट क्लब पर लोगों को हैलमेट पहनने की सलाह दी, लेकिन इससे कुछ दूर पहले नये पुल और इसके बाद पुराने पुल पर लोग भारी जाम से जूझते रहे। यहां किसी ने जाम खुलवाने की जहमत नहीं उठाई। ऐसे में लोगों में इस बात को लेकर रोष पनपना शुरू हो गया है कि पुलिस प्रशासन चालान काटने के लिए तैयार हो जाता है, लेकिन जाम की समस्या से निजात के लिए कोई अधिकारी कर्मचारी सड़कों पर नहीं दिखाई देता। ऐसे में पुलिस प्रशासन यदि लोगों को सुचारु यातायात सुविधा उपलब्ध कराने में नाकाम रहता है तो सीपीयू को लोगों का विरोध झेलना पड़ सकता है।
अपराध पर नियंत्रण में मिल सकती है सफलता
रुड़की। सीपीयू के तैनात होने से इस बात की उम्मीद की जा सकती है इससे अपराध नियंत्रण में सफलता मिलेगी। सीपीयू के आने से शहर की सड़कों पर करीब 30 जवान जगह-जगह तैनात रहेंगे। ऐसे में अपराध कर भाग रहे बदमाशों को पकड़ना आसान होगा और इससे अपराध पर लगाम भी लगेगी।
ज्यादा रोकटोक और अभद्रता के चलते फेल हुई थी सीपीयू
जिले में हरिद्वार शहर में सीपीयू है। अब रुड़की में भी इसे लागू कर दिया है, लेकिन पुराने अनुभव का संज्ञान ले तो सीपीयू की सफलता चुनौती भरी है। क्योंकि शहर में गांव-देहात के लोगों का खासा दखल है।
करीब दो साल पहले रुड़की में सीपीयू की व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन कुछ ही दिन बाद यहां सीपीयू विवादों के घेरे में आ गई थी। बीएसएम तिराहे पर चेकिंग के दौरान कुछ लोगों ने सीपीयू पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। इसके अलावा भी कई विवाद हुए। जिसके बाद एसएसपी ने रुड़की को सीपीयू को हटा लिया था। वहीं सरकार के गठन के बाद स्थानीय नेताओं का भी पुलिस प्रशासन पर दबाव रहेगा। यदि फिर से कोई विवाद होता है तो यह सीपीयू की सफलता पर भारी पड़ सकता है।