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Roorkee News: ई-रिक्शा की रफ्तार में थमे मेटाडोर के पहिये

Sun, 17 May 2026 07:13 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
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केवल नाम का रह गया कलियर मेटाडोर अड्डा, अब खड़े रहेत हैं ई रिक्शा
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दिनभर में करीब 10 मेटाडोर का हो रहा रुड़की से कलियर तक संचालन

करीब 10 साल पूर्व 30 से अधिक मेटाडोर का नियमित होता था संचालन
- रोजगार बचाने के लिए मेटाडोर चालकों ने तय रूट और संख्या निर्धारित करने की मांग उठाई
रुड़की। रुड़की से पिरान कलियर तक यात्रियों की पहली पसंद रहे मेटाडोर अब धीरे-धीरे सड़कों से गायब होते जा रहे हैं। बढ़ती ई-रिक्शा संख्या और अनियंत्रित संचालन के चलते कलियर मेटाडोर अड्डा अब केवल नाम मात्र रह गया है। हालत यह है कि जहां करीब दस साल पहले इस मार्ग पर 30 से अधिक मेटाडोर नियमित चलते थे, वहीं अब दिनभर में मुश्किल से 10 मेटाडोर ही संचालित हो पा रहे हैं।

मेटाडोर का किराया 10 रुपये प्रति यात्री है, जबकि ई-रिक्शा 20 रुपये प्रति यात्री वसूल रहे हैं। बावजूद इसके सवारियां ई-रिक्शा की ओर बढ़ रही हैं, जिससे मेटाडोर चालकों और मालिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई चालक वाहन खड़े करने को मजबूर हैं, जबकि कुछ को घाटे के चलते अपने वाहन बेचने पड़े।
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चालक विनोद पुरी ने बताया कि पहले दिनभर में कई चक्कर लग जाते थे, लेकिन अब सवारियां ई-रिक्शा में चली जाती हैं। व्यापार में नुकसान होने पर उन्हें अपने दो वाहन बेचने पड़े। अनीस अहमद ने कहा कि उर्स के दौरान कारोबार बेहतर होने की उम्मीद रहती है, लेकिन उस समय ई-रिक्शाओं की संख्या और बढ़ जाती है। चालक नदीम का कहना है कि मेटाडोर सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण साधन हैं, लेकिन उनकी अनदेखी की जा रही है। वहीं चालक संजय ने प्रशासन से ई-रिक्शा के लिए निर्धारित रूट और संख्या तय करने तथा मेटाडोर चालकों के हित में ठोस नीति बनाने की मांग की है।
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लंबे संघर्ष के बाद मिला था मेटाडोर संचालन का परमिट
मिनी बस मालिक-चालक वेलफेयर सोसायटी से जुड़े रहे विनोद पुरी ने बताया कि रुड़की से पिरान कलियर मार्ग पर मेटाडोर संचालन के लिए परमिट हासिल करने को लेकर लंबा संघर्ष करना पड़ा था। आरटीओ से लेकर सचिवालय तक लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने बताया कि कांवड़ पटरी मार्ग पर यात्रियों को सुरक्षित, सस्ता और आरामदायक सफर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मिनी बस सेवा शुरू कराई गई थी। मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों के सामने समस्या और समाधान रखने के बाद ही रुड़की से कलियर तक मेटाडोर संचालन के परमिट जारी किए गए थे।
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