क्षेत्र में रबी की फसलों में गेहूं और सरसों मुख्य फसलें हैं लेकिन नवंबर के अंत से मार्च तक इनपर माहू कीट खतरा बना रहता है। इस कीट के प्रकोप से सरसों के पौधे सूखने लगते हैं और उपज पर असर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान समय रहते उपचार करें तो नुकसान से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार माहू कीट पत्तियों, टहनियों, फूलों और फलियों से रस चूसता है। इससे फसल कमजोर पड़ जाती है। फूल झड़ने लगते हैं और फलियां विकसित नहीं हो पातीं। समय पर नियंत्रण न होने पर उपज में भारी कमी आती है। नारसन स्थित राजा महेंद्र प्रताप डिग्री कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सर्वेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि समय पर नियंत्रण के उपाय अपनाने से किसान फसल को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं।
इस तरह करें माहू कीट की रोकथाम
- मेटासिस्टाक्स दवा का छिड़काव करें या थायोमेथाक्साम 25 डब्ल्यूजी का उपयोग करें।
- कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उचित कीटनाशक का छिड़काव करें।
- फसल का नियमित निरीक्षण करते रहें और प्रकोप की शुरुआत में ही रोकथाम करें।
- जैविक उपचार की दिशा में नीम का तेल या अन्य जैविक कीटनाशकों का उपयोग भी लाभकारी है।
- पीली चिपकने वाली पट्टियों का उपयोग करके भी कीट की संख्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।