बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों में बदलाव से पथरी के मामले बढ़ रहे हैं। देेहात क्षेत्र से भी पथरी की समस्या लेकर ग्रामीण अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। चिकित्सक पथरी की समस्या से बचाव के लिए खानपान और दिनचर्या में बदलाव की सलाह दे रहे हैं।
सरकारी व निजी अस्पतालों में पथरी की समस्या से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है। अधिकांश मामलों में लोगों को पथरी होने का पता नहीं लग पाता। अचानक असहनीय दर्द होने पर लोगों को गुर्दे या पित्त की थैली में पथरी होने की जानकारी मिलती है। गण क्षेत्र में भी पथरी के मामले बढ़े हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग कृषि कार्य और मजदूरी से जुड़े हैं। लंबे समय तक धूप में काम करने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं पीने से उन्हें पथरी की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा अधिक नमक, मसालेदार भोजन का सेवन, फल सब्जियों का कम सेवन करने और शरीर में पानी की कमी पथरी होने के प्रमुख कारण हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लक्सर में रोजाना पथरी की समस्या से संबंधित 10 - 15 लोग उपचार के लिए आते हैं। लक्सर सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. सैयद रफी अहमद के अनुसार, किडनी में बनने वाली पथरी कई बार छोटी होने पर स्वयं बाहर निकल जाती है। बड़ी पथरी के कारण तेज दर्द, पेशाब में जलन या खून आना, उल्टी और पेशाब रुकना, पेट या कमर में एक ओर अचानक तेज दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, नमक का सेवन सीमित मात्रा में करने, संतुलित व पौष्टिक आहार लेना चाहिए। लक्षण नजर आने पर समय से जांच और उपचार से समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।