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साहब! बच्चे हैं छोटे, तो नहीं चढ़ सकता हूं पहाड़

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साहब! बच्चे अभी छोटे हैं और उनकी देखभाल जरूरी है। बच्चों को पहाड़ पर साथ नहीं रख सकता हूं। ऐसे प्रार्थनापत्र कई पुलिसकर्मी तबादला रुकवाने के लिए अधिकारियों के कार्यालयों में लेकर पहुंच रहे हैं। एसपी देहात कार्यालय में कांवड़ यात्रा के बाद से अब तक करीब 20 से अधिक पत्र आ चुके हैं।
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हरिद्वार से सिपाही से लेकर दरोगाओं के तबादले कांवड़ यात्रा से पहले गैनजनपद में हुए थे। कांवड़ यात्रा की वजह से पुलिस अधिकारियों ने इन तबादलों पर रोक लगा दी थी। अब कांवड़ यात्रा सकुशल संपन्न हो गई है तो पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में कई पुलिसकर्मी अपना तबादला रुकवाने के लिए पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने लगे हैं। पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए जा रहे हैं। इन प्रार्थना पत्र में सिपाहियों की ओर से तरह-तरह की परेशानी बताई जा रही हैं।
सिपाही परेशानी बता रहे हैं कि उनके बच्चे अभी छोटे हैं और वह पहाड़ पर साथ नहीं रह सकते हैं। उनका तबादला रोका जाए। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई से लेकर पत्नी के बीमार होने की परेशानी बताई जा रही है। साथ ही परेशानी बताई जा रही है कि वह खुद शुगर, बीपी और अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं जिसके कारण पहाड़ पर नौकरी नहीं कर सकते हैं। वहां पर उन्हें सही तरह से उपचार नहीं मिल सकता है इसलिए उनका तबादला गैरजनपद न किया जाए।
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अधिकारियों के फैसले पर उठ रहे सवाल
सूत्रों के अनुसार कई इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाही ऐसे हैं जिनकी 15 से 20 साल की नौकरी हरिद्वार में ही हो गई है। उनका किसी दूसरे जनपद में तबादला नहीं हुआ है। वहीं कुछ इंस्पेक्टर ऐसे हैं जिन्होंने कुछ दिनों ही पहाड़ पर नौकरी की और फिर से हरिद्वार में आकर चार्ज संभाल लिया। ।
कुछ पुलिसकर्मियों के प्रार्थना पत्र आ रहे हैं जिनमें वह बीमारी और अन्य परेशानी बताकर अपना तबादला कुछ दिनों के लिए रुकवाना चाहते हैं। सभी के प्रार्थना पत्र उच्चाधिकारियों को भेजे जा रहे हैं।-प्रमेंद्र सिंह डोबाल, एसपी देहात
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