नया मकान बनाने पर पुराने मकान के विद्युत कनेक्शन को स्थाई रूप से विच्छेदित कराने के बाद भी बिजली विभाग की ओर से उक्त कनेक्शन का 89192 रुपये का डिमांड नोटिस जारी करना उपभोक्ता सेवा में कमी माना गया है। इसे लेकर जिला उपभोक्ता फोरम ने निगम के डिमांड नोटिस निरस्त करते हुए पीड़ित को वाद खर्च के रूप में पांच हजार रुपये देने का भी फैसला सुनाया है।
उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने बताया कि मोहल्ला किला, लंढौरा निवासी रमेश चंद सहगल ने अपने किराये के पुराने मकान में एक विद्युत कनेक्शन लिया था। लेकिन, नया मकान बनाने के बाद उक्त कनेक्शन को 14 मार्च 1991 में अस्थाई विच्छेदन और 23 सितंबर 1994 में स्थाई रूप से विच्छेदित कराया। इसके बावजूद बिजली विभाग ने उक्त कनेक्शन की बाबत गलत रूप से अंकन 89192 रुपये का डिमांड नोटिस जारी कर दिया।
इस पर रमेश चंद ने वर्ष 2015 से कई प्रार्थना पत्र दिए। लेकिन, अधिकारियों के आदेशित करने पर भी डिमांड नोटिस निरस्त नहीं किया गया तो 29 मार्च 2016 कसे उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई गई। फोरम के अध्यक्ष कंवरसैन, सदस्यगण अंजना चढ्ढा और विपिन कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्थाई रूप से कनेक्शन विच्छेदित होने पर भी उक्त कनेक्शन की बाबत अंकन 89192 रुपये के भेजे गए डिमांड नोटिस को निरस्त कर दिया है और पीड़ित को वाद खर्च के रूप में पांच हजार रुपये अदा देने का भी आदेश दिया है।