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होटलों पर शिकंजे से बोर्ड होगा मालामाल

Fri, 15 Apr 2016 12:13 AM IST
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की
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रुड़की। होटलों के रजिस्ट्रेशन से जहां एक ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मालामाल हो सकता है वहीं प्रत्येक वर्ष करोड़ों के राजस्व से गंगा को स्वच्छ बनाने की दिशा में भी बड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इसी को देखते हुए एनजीटी ने प्रदेश के एक हजार से अधिक होटल व धर्मशालाओं को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रजिस्ट्रेशन के दायरे में लाने के सख्त आदेश जारी किए हैं।
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एनजीटी ने करीब छह माह पूर्व राज्य सरकार से गंगा किनारे स्थित होटल और धर्मशालाओं आदि को प्रदूषण बोर्ड की अनुमति नहीं लेने पर बंद कराने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद राज्य सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए। अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बड़े होटलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके तहत हरिद्वार के आठ होटलों को नोटिस जारी किए हैं। सूत्रों के अनुसार बोर्ड यह मानकर चल रहा है कि बड़े प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई होगी तो छोटे प्रतिष्ठान खुद ही बोर्ड से अनुमति के लिए आवेदन करेंगे। कुछ माह से बोर्ड की सख्ती का असर दिखने लग गया है।

पिछले दो माह में जिले में करीब 27 होटलों ने अनुमति के लिए बोर्ड को आवेदन किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि धीरे-धीरे प्रदेशभर के एक हजार से अधिक होटल और धर्मशालाएं बोर्ड के दायरे आ जाएंगी। हालांकि इसमें सफलता पाना बोर्ड के लिए भी चुनौती भरा होगा। लेकिन इसमें कामयाबी मिलती है तो बोर्ड को हर साल करीब पांच करोड़ रुपये तक आय हो सकती है। इसे गंगा की स्वच्छता के लिए ट्रीटमेंट आदि प्लांट स्थापित करने में खर्च किया जा सकता है।
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20 से ज्यादा कमरे वाले होटल पर दस हजार शुल्क
रुड़की। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. अंकुर कंसल ने बताया कि बोर्ड से अनुमति प्राप्त करने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों को निर्धारित शुल्क जमा कराना होता है। इसके तहत 20 कमरों से अधिक क्षमता वाले होटल संचालकों पर सालाना करीब 10 हजार रुपये का शुल्क लगेगा। कम क्षमता वाले होटलों से सालाना मात्र 2000 रुपये वसूला जाएगा। इसी तहत विभिन्न प्रतिष्ठानों पर उनकी क्षमता के अनुसार शुल्क लिया जाता है।
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