सेना के जबरन क्वार्टर खाली कराए जाने के विरोध में जेएम से वार्ता करते सिविलियन
- फोटो : amarujala
छावनी क्षेत्र स्थित 24 क्वार्टरों को सेना ने रविवार को सिविल कर्मचारियों से जबरन खाली करवाकर सामान बाहर रखकर अपने ताले जड़ दिए। सिविल कर्मचारियों की शिकायत पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मंगेश घिल्ड़ियाल मौके पर पहुंचे। लेकिन सेना अधिकारी ने कार्रवाई को नियमानुसार बताते हुए कर्मचारियों को और समय देने से साफ इनकार कर दिया।
छावनी क्षेत्र में एक जगह 72 क्वार्टर बने हुए हैं। फिलहाल 24 क्वार्टरों में सेना के सिविल कर्मचारी परिवार सहित लंबे समय से रह रहे हैं। सेना अधिकारी वर्ष 2011 में इन कर्मचारियों को क्वार्टर खाली करने के नोटिस दे रही थी। लेकिन कर्मचारी क्वार्टर खाली नहीं कर रहे थे। अंतिम नोटिस में चेतावनी दी गई थी यदि कोई कर्मचारी 30 अप्रैल तक क्वार्टर खाली नहीं करता तो फिर सेना क्वार्टर खाली कराएगी।
अल्टीमेटम पूरा होने पर रविवार को पहले 24 क्वार्टरों की बिजली और पानी की सप्लाई बंद कराई गई। उसके बाद सेना की ओर से मौके पर पुलिस टीम बुलाई और क्वार्टर खाली कराकर उन पर सेना के ताले लगा दिए गए। सिविल कर्मचारियों की शिकायत पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मंगेश घिल्ड़ियाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने संबंधित सेना अधिकारियों से वार्ता की। लेकिन सेना अधिकारियों ने बताया कि क्वार्टर नियमानुसार खाली कराएं गए हैं।
क्या कहते हैं सिविल कर्मचारी
सिविल कर्मचारी मोहम्मद फरीद, ब्रह्मानंद, हीरालाल आदि का कहना है कि उन्हें इस तरह से क्वार्टर से नहीं निकाला जा सकता। क्योंकि वह भी सेना में नौकरी करते हैं। इन क्वार्टरों में रहने की एवज में उनके वेतन से मकान भत्ता आदि भी कटता है। बताया कि आर्मी हेडक्वार्टर को उन्होंने इस संबंध में 11 अप्रैल को पत्र भेजा था। अभी उसका जवाब आना शेष है। लेकिन उससे पहले उनका सामान बाहर कर दिया।
सिविल कर्मचारियों की शिकायत पर वह मौके पर गए थे। संबंधित सेना अधिकारियों से भी वार्ता की। लेकिन उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 से इस संबंध में कर्मचारियों को नोटिस दिए जा रहे हैं। कुछ कर्मचारियों ने क्वार्टर खाली करने के लिए शपथ पत्र भी दिए थे। लेकिन उसके बाद भी क्वार्टर खाली नहीं किए। हालांकि वह इस संबंध में अभी सेना अधिकारियों से बातचीत कर समस्या समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।
मंगेश घिल्ड़ियाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, रुड़की।