रुड़की। हरिद्वार जिले की तीनों शुगर मिलों की ओर से पेराई के सापेक्ष भुगतान नहीं किया जा रहा हैं। इस कारण शुगर मिलों पर 157 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान पहुंच गया है। किसान नेताओं ने टैगिंग आदेश के अनुसार 14 दिन में भुगतान करने की मांग की है।
हरिद्वार जिले में अधिकतर किसान गन्ने की खेती करते हैं, जिसकी आपूर्ति लक्सर, इकबालपुर और लिब्बरहेड़ी शुगर मिल को की जाती है। लक्सर और लिब्बरहेड़ी शुगर मिल को पेराई सत्र की शुरुआत किए हुए लगभग दो माह का समय गुजर चुका है। वहीं इकबालपुर शुगर मिल ने 12 दिसंबर को पेराई सत्र शुरू किया था। इसके बाद कई दिनों तक शुगर मिल पर धरने के कारण पेराई बंद भी रही है। तीनों शुगर मिलों पर करीब 157 करोड़ का बकाया है, जो इस बात का प्रमाण है कि जिस रफ्तार से गन्ने की खरीद की जा रही है। उसके सापेक्ष गन्ने का भुगतान नहीं किया जा रहा है। किसान नेता महकार सिंह, पदम भाटी व विजय शास्त्री आदि का कहना है कि टैगिंग आदेश के अनुसार 14 दिन में भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन किसानों की मांगों पर कोई संज्ञान नहीं लिया जाता है। किसान इसके लिए कई बार आंदोलन किए जा चुके है।
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लक्सर- 90 करोड़
लिब्बरहेड़ी- 60 करोड़
इकबालपुर- 7 करोड़
कुल- 157 करोड़
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इकबालपुर भुगतान में फिसड्डी
लक्सर व लिब्बरहेड़ी शुगर मिलें जहां विगत सत्र का पूरा भुगतान जारी कर चुकी हैं, वहीं इकबालपुर शुगर मिल पर सत्र 2017-18 का करीब 40 करोड़ का भुगतान बकाया है। वहीं पेराई सत्र 2018-19 का करीब 100 करोड़ से अधिक का भुगतान बकाया है। किसान नेता विगत सत्रों के भुगतान की मांग को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
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समितियों को भी उठानी पड़ रही परेशानी
शुगर मिलें जहां किसानों के भुगतान में देरी कर रही हैं, वहीं गन्ना समितियां भी शुगर मिलों के रैवये की मार झेल रही हैं। गन्ना खरीदने के सापेक्ष शुगर मिलों द्वारा कुछ विकास कमीशन गन्ना समितियों को भी दिया जाता है, लेकिन शुगर मिलें, गन्ना समितियों का विकास कमीशन भी दबाए बैठे हैं। इस कारण गन्ना समितियों के कर्मचारियों को वेतन आदि मिलने में देरी होती है।
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तीनों शुगर मिलों पर वर्तमान पेराई सत्र का 157 करोड़ का गन्ना भुगतान बकाया है। किसानों का गन्ना भुगतान जारी कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
-शैलेंद्र सिंह, सहायक गन्ना आयुक्त, हरिद्वार