टांडा हसनगढ़ और घेर गोशाला गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर शुक्रवार को सोलानी नदी में पानी आने से ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो गया। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर मार्ग पूरी तरह बंद है। पानी उतरने के बाद भी कई दिनों तक मार्ग पर जलभराव की स्थिति बनी रहती है। इससे राहगीरों के साथ ही स्कूली बच्चों को भी परेशानी उठानी पड़ी। कई लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करते दिखे।
ग्रामीण संदीप कांबोज, अभि कुमार, शकील अहमद, सलामत, बुरहान आदि ने बताया कि बरसात के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। नदी में पानी बढ़ने के बाद बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। वहीं, किसी ग्रामीण के बीमार होने पर उसे अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के दूसरी ओर हजारों की आबादी रहती है लेकिन आवागमन के लिए आज तक यहां पक्का रपटा या पुल नहीं बनाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि देश की आजादी के बाद से अब तक वे इसी तरह नदी पार कर आवागमन करने के लिए मजबूर हैं। मार्ग पर न तो कोई रपटा बना है और न ही बरसात के दौरान आवागमन के लिए कोई स्थायी व्यवस्था की गई है।
गर्मियों में किसी तरह आवाजाही हो जाती है लेकिन बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति बद से बदतर हो जाती है और गांवों का संपर्क टूट जाता है। ग्रामीणों के अनुसार समस्या के समाधान के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से 21 नवंबर 2024 को सोलानी नदी पर 300 मीटर लंबे सेतु के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था। विभागीय पत्र के अनुसार राज्य योजना वर्ष 2024-25 के तहत ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र में ग्राम झीवरहेड़ी से टांडा हसनगढ़ और घेर गौशाला होते हुए गांजा मजरा तक जोड़ने वाले मार्ग पर सेतु निर्माण प्रस्तावित है।
इसके लिए विभाग की ओर से आगणन तैयार कर शासन को भेजा गया था। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनना तो दूर, आज तक नदी पर आवागमन के लिए रपटा तक नहीं बनाया गया है। ऐसे में बरसात के दिनों में ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। उन्होंने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से प्रस्तावित पुल का निर्माण जल्द शुरू कराने तथा तब तक अस्थायी रपटे की व्यवस्था कराने की मांग की है। वहीं एसडीएम डीएस नेगी का कहना है कि इस संबंध में पीडब्लूडी से जानकारी ली जाएगी ताकि समस्या का समाधान कराया जा सके।