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67 लाख टेंडरों में अनियमितता की एसआईटी से जांच की मांग

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रुड़की। नगर निगम में बरसात के समय जारी किए गए 12 नालों की सफाई के 67 लाख के टेंडरों की जांच में देरी का आरोप लगाते हुए अब शिकायतकर्ता ने एक बार फिर पीएम कार्यालय, मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री से शिकायत की है। साथ ही टेंडरों में भारी अनियमितता किए जाने का आरोप लगाते हुए एसआईटी जांच की मांग की है। पत्र में शिकायतकर्ता ने बताया कि टेंडर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार किए गए हैं।
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गौरतलब है कि नगर निगम की ओर से बरसात से ठीक पहले 12 बड़े नालों की सफाई के लिए 67 लाख रुपयों के टेंडर जारी किए गए थे। टेंडर जारी होने के बाद किया गया नाला सफाई का कार्य सही प्रकार से नहीं होने को लेकर लोगों ने काफी हंगामा किया था। उस समय वर्तमान मेयर गौरव गोयल ने भी नालों की सफाई सही ढंग से नहीं होने पर निगम के अधिकारियों को घेरा था। पिछले दिनों शिकायतकर्ता संजय गुप्ता उर्फ नीलू ने मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री को पत्र भेजकर बताया था कि उक्त टेंडर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार जारी किए गए हैं। इस पर करीब 15 दिन पूर्व शहरी विकास सचिव ने जांच के आदेश भी दिए थे, लेकिन जांच पूरी नहीं होने पर अब शिकायतकर्ता ने फिर से पीएम कार्यालय, मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री को पत्र भेजकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में कहा गया है कि एक फर्म ने जो अनुभव प्रमाणपत्र लगाया है, वह झबरेड़ा नगर पंचायत की ओर से जारी किया गया है। लेकिन सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना से जो जानकारी प्राप्त हुई है, उसके अनुसार झबरेड़ा नगर पंचायत ने संबंधित फर्म से नाला सफाई का कोई काम नहीं कराया है। यही नहीं, नगर निगम के अधिकारियों ने भी प्रमाण पत्रों की जांच किए बगैर टेंडर जारी किए हैं। अब जानबूझकर जांच में देरी की जा रही है। वहीं इस बाबत मुख्य नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने बताया है कि मामले में जांच कमेटी का गठन किया गया है। जल्द ही जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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