रबी की प्रमुख फसलों गेहूं और सरसों की बुआई के बीच डीएपी खाद की किल्लत से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। झबरेड़ा, इकबालपुर और लखनौता क्षेत्र की सहकारी समितियों में कई दिनों से डीएपी खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण किसान समितियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। खाद नहीं मिलने से फसलों की बुआई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
क्षेत्र में सरसों की बुआई शुरू हो चुकी है और करीब 50 प्रतिशत क्षेत्र में बुआई होने का अनुमान है। वहीं, गेहूं की बुआई ने भी रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। ऐसे में किसानों को खेत तैयार करने और फसल की बुआई के लिए डीएपी खाद की जरूरत पड़ रही है। खाद नहीं मिलने पर किसान पोटाश, सिंगल सुपर फॉस्फेट और यूरिया आदि के माध्यम से वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं।
इससे उनकी लागत बढ़ रही है। किसान राजपाल सिंह, बिजेंद्र और संजय ने बताया कि डीएपी नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में कुछ खेतों में बिना खाद के ही सरसों की बुआई करनी पड़ी है। इससे फसल के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि बुआई के समय खाद नहीं मिलने से बाद में आपूर्ति होने का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। झबरेड़ा सहकारी समिति के एमडी तलवार सिंह ने बताया कि समिति में एक-दो दिन में डीएपी खाद उपलब्ध होना शुरू हो जाएगा। खाद की आपूर्ति होने पर किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।