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Roorkee News: रुड़की के 9000 बेजुबानों पर एक करोड़ का पहरा

Sun, 24 May 2026 05:28 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
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रुड़की के 9000 बेजुबानों पर एक करोड़ का पहरा
एबीसी सेंटर में होगा बधियाकरण, टीकाकरण और देखभाल एक साल में पूरा होगा अभियान
निगम प्रतिदिन 30 से 40 कुत्तों को पकड़कर पहुंचा रहा सेंटर, प्रति कुत्ता 1089 रुपये खर्च
एक दिन में 30 से 40, एक माह में 700 से 800 कुत्तों को पकड़ रहे कर्मी
शहर के कुत्तों का इलाज कर वहीं छोड़ने की प्रक्रिया पूरी होने में लगेगा करीब एक वर्ष
अंकित गर्ग
रुड़की। शहर की सड़कों और गलियों में घूम रहे करीब 9000 लावारिस कुत्तों के बधियाकरण, इलाज और टीकाकरण पर नगर निगम को लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। नगर निगम ने सालियर स्थित अपनी भूमि पर एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर बनाया है, जहां पकड़े गए कुत्तों को रखकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण, बधियाकरण और एंटी रेबीज टीकाकरण कराया जा रहा है।नगर निगम ने यह जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी है, जिसे प्रति कुत्ता 1089 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि कुल खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा पशु कल्याण बोर्ड की ओर से निगम को वापस मिलेगा। सेंटर में कुत्तों को करीब चार दिन तक रखकर उनकी देखभाल और भोजन की व्यवस्था की जाती है। स्वस्थ होने के बाद उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, जहां से पकड़ा गया था। नगर निगम के अनुसार कंपनी के कर्मचारी प्रतिदिन 30 से 40 कुत्तों को पकड़कर सेंटर तक ला रहे हैं। छुट्टियों को छोड़कर हर माह करीब 700 से 800 कुत्तों का बधियाकरण हो पा रहा है। इसी रफ्तार से अभियान जारी रहा तो शहर के सभी लावारिस कुत्तों का बधियाकरण पूरा करने में करीब एक वर्ष का समय लग सकता है। नगर आयुक्त राकेश चंद्र तिवारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अभियान में सभी सावधानियों का पालन किया जा रहा है।


तीन से चार साल में कम दिखने लगेगी कुत्तों की संख्या
- इस अभियान का असर आने वाले तीन से चार वर्षों में साफ दिखाई देने लगेगा। निगम अधिकारियों के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में लावारिस कुत्तों का बधियाकरण और टीकाकरण किए जाने के बाद इनके प्रजनन की रफ्तार कम होगी, जिससे धीरे-धीरे इनकी संख्या घटने लगेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी शहर में कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका नियमित बधियाकरण अभियान ही माना जाता है। -
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आसपास के गांवों के कुत्तों के इलाज में लगेगा लंबा वक्त
- नगर निगम के सामने शहर के अलावा आसपास के गांवों से आने वाले लावारिस कुत्ते भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। शहर की सीमाओं से सटे कई गांवों के कुत्ते भी भोजन की तलाश में शहरी क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। ऐसे में केवल शहर के कुत्तों का बधियाकरण कर देने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। आसपास के गांवों में भी इस अभियान को लागू करना होगा। ऐसे में सभी जगहों पर कुत्तों का टीकाकरण करने में लंबा वक्त लगेगा।
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सार्वजनिक स्थलों से हटेंगे कुत्ते, शेल्टर में करेंगे आराम
- शहर में सार्वजनिक स्थलों पर घूमने वाले लावारिस कुत्तों की देखभाल के लिए नगर निगम शेल्टर बनाने की तैयारी कर रहा है। शेल्टर में कुत्तों के भोजन, उपचार और निगरानी की व्यवस्था भी की जाएगी। शेल्टर के डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी गई है। सालियर स्थित भूमि में करीब एक एकड़ में इसका निर्माण होगा। इसके बाद यहां रोडवेज, रेलवे स्टेशन, सिविल अस्पताल समेत सभी सार्वजिनक स्थलों पर रहने वाले कुत्तों को रेस्क्यू कर शेल्टर में रखा जाएगा।
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