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गणेशपुर में सड़क धंसने से आई दरार के बाद मकानों को खाली कराया

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रुड़की। सड़क में पानी के रिसाव के चलते धंसी सड़क में बरसात का पानी घुसने से बृहस्पतिवार की देर शाम कई घरों में आई दरारों के बाद एहतियात के तौर पर घरों को खाली करा दिया गया है। वहीं एडीएबी ने राहत कार्य शुरू करते हुए सड़क की मरम्मत के साथ ही पानी के रिसाव को रोकने के लिए प्लास्टिक के पाइप बिछा दिए हैं।
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गौरतलब है कि करीब दस दिन पहले गणेशपुर में सड़क में पानी का रिसाव होने के कारण गड्ढा बन गया था। आसपास के लोगों ने एडीबी से शिकायत भी की थी। इसके बाद एडीबी ने जलसंस्थान को पत्र लिखा था। इसी बीच विगत दो दिन से हुई बारिश के दौरान यहां जलभराव का पानी उस रिसाव वाली जगह में भरने लगा और आसपास के मकानों की नींव तक पहुंच गया। इस कारण बृहस्पतिवार की शाम अचानक तीन मकानों और दो-तीन दुकानों में दरारें आने लगी। एक मकान की दीवार की ईंट भी निकलने लगी। सूचना पर मेयर गौरव गोयल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मयंक गुप्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने मकानों को खाली कराने के साथ ही एडीबी के अधिकारियों को मौके पर बुलवाया। यही नहीं ऊर्जा निगम की टीम को मौके पर बुलवाकर विद्युत कनेक्शन भी कटवा दिए गए। इसके बाद रात में ही एडीबी के ऐई संजीव कुमार, जेई अनमोल कुमार ने राहत कार्य शुरू करते हुए सड़क पर ईंट और बजरी का डामर बिछाते हुए पानी के रिसाव को रोकने के लिए पाइप बिछवाने का काम शुरू कर दिया था। एई संजीव कुमार ने बताया कि फिलहाल रिसाव को पूरी तरह रोक दिया गया है ताकि आगे कोई नुकसान न हो। इसके बाद स्थाई रूप से सड़क के निर्माण का काम पूरा कराया जाएगा। उधर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल ने बताया कि उच्च स्तरीय जांच कमेटी के गठन के बाद जो भी रिपोर्ट आएगी, उसके आधार पर लापरवाही बरतने वाले संबंधित विभाग के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आखिर कौन है जिम्मेदार
बताया जा रहा है कि जिन मकानों में दरारें आई हैं, वहां करीब दस दिन पहले शिकायत मिलने पर एडीबी ने जल संस्थान को पत्र भेजकर जल संस्थान की लाइनों में लीकेज की जानकारी दी थी, लेकिन लाइन को ठीक नहीं कराया गया और सड़क धंस गई। एई संजीव कुमार ने बताया कि जल संस्थान को लीकेज ठीक कराने के लिए पत्र भेजा गया था। लेकिन इसके बाद यह जानकारी नहीं है कि लीकेज ठीक कराई गई थी या नहीं। ऐसे में यह अपने आप में बड़ा सवाल बन गया है कि इस घटना का जिम्मेदार एडीबी है या फिर जल संस्थान।
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जल संस्थान की नहीं है गलती, ठीक करा दिया था लीकेज
जलसंस्थान के अधिकारियों की माने तो सड़क धंसने के पीछे उनके विभाग की कोई गलती नहीं है। जलकल अभियंता राजेश निर्वाल ने बताया कि 14 अगस्त को सूचना मिली थी कि एक कनेक्शन में खराबी के पानी का रिसाव हो रहा है। इसके बाद कर्मचारियों को मौके पर भेजकर कनेक्शन की मरम्मत करने के बाद स्थानीय पार्षद को अवगत करा दिया गया। इसके बाद 15 अगस्त को फिर से पानी रिसाव की सूचना मिली। इसके बाद फिर से स्थानीय पार्षद की मौजूदगी में कर्मचारियों ने निरीक्षण किया, लेकिन वहां कोई भी लीकेज नहीं पाई गई।
मकानों में दरारें देखकर बैठ गया दिल
रुड़की। शहर में सड़क धंसने पर इस तरह मकानों में दरारें आने और इनके गिरने का खतरा होने से लोगों में दहशत का माहौल है। मकानों में दरारें आई तो मानो घरों में रह रहे लोगों का दिल दहल गया। बृहस्पतिवार की देर शाम सड़क धंसने से जब एक-एक कर तीन मकानों और दुकानों में दरारें आनी शुरू हुई तो इनमें रह रहे लोगों का दिल बैठ गया। घरों में रह रहे लोगों में चीख पुकार मचने लगी। पड़ोस के लोग भी सहम गए। लोगों ने जो बेहद जरूरी सामान था, उसे अपने साथ लिया और अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के यहां शरण ली। इस दौरान मोहल्ले के सभी लोगों में डर और दहशत का माहौल था।
पहले भी निर्माण कार्यों के चलते आ चुकी हैं दरारें
शहर में निर्माण कार्यों में लापरवाही के चलते मकानों में आई दरारों का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई लोग इसका खामियाजा भुगत चुके हैं। करीब डेढ़ साल पहले मच्छी मोहल्ले में सीवर लाइन डालते समय अचानक आठ घरों में दरारें आ गई थी। यही नहीं कुछ मकान तो दो-तीन इंच तक एक तरफ झुक गए थे। इसके बाद लोगों की शिकायत पर निर्माण एजेंसी ने इन लोगों को एक लाख रुपये तक मुआवजा दिया गया था। पीड़ित मोहम्मद हनीफ ने बताया कि उनके मकानों में आई दरारों से लाखों का नुकसान हुआ है, अब हमेशा बड़े नुकसान का खतरा बना रहता है। कंपनी ने 80-90 हजार रुपये देकर पल्ला झाड़ लिया है। ऐसे में अब तो किसी से शिकायत करने का भी मन नहीं करता।
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