रुड़की। पड़ोसियों से मामूली बात पर झगड़ा एक परिवार को इतना भारी पड़ा कि बेटे की शादी के लिए हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। बहु घर लाने के लिए बेटे का मेडिकल भी कराया गया। अब हाइकोर्ट ने परिवार को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश दिए हैं। रंजिश के चलते करीब डेढ़ महीने पहले अधर में लटकी पड़ी शादी गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है।
गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में साल भर पहले दो परिवारों के बीच मामूली कहासुनी के बाद झगड़ा हो गया था। दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ क्रास रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एक पक्ष ने मुकदमे में नामजद किए गए बेटे को नाबालिग बताया था। कुछ प्रमाणपत्र कोर्ट में पेश करने के बाद बेटे का नाम केस से बाहर भी हो गया था। करीब डेढ़ महीने पहले परिवार बेटे की शादी करने लगा तो दूसरे पक्ष ने नाबालिग बेटे की शादी की शिकायत मानवाधिकार आयोग में कर दी। आयोग के निर्देश पर बारात जाने से एक दिन पहले ही पुलिस घर पर पहुंची और शादी न करने की हिदायत दी।
कानूनी पेच फंसने पर सारी तैयारियों के बावजूद परिवार और बेटे के ससुराल वालों को शादी न करने का लिखित भरोसा दिलाना पड़ा। शादी में रंजिश का अड़ंगा लगने पर परिवार ने बेटे का मेडिकल कराया जिसमें वह बालिग पाया गया। इसके बाद शादी में पुलिस सुरक्षा के लिए हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। कोर्ट ने परिवार को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश दिए। रविवार को परिवार आदेश लेकर गंगनहर कोतवाली पहुंचा। कोतवाली प्रभारी जवाहर लाल ने बताया कि आदेश देखा जा रहा है, कोर्ट के आदेश के मुताबिक जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
शादी होगी तो मुकदमे में फंसेगा पेच
तमाम जद्दोजहद के बाद परिवार आखिरकार बेटे की बहु घर लाने में तो सफल हो ही जाएगा, मगर दूसरा पक्ष अब मुकदमे में टांग खिंचाई करेगा। दरअसल परिवार कोर्ट में पहले बेटे को नाबालिग साबित कर चुका है। उसी आधार पर बेटे को केस से बाहर निकालने में मदद मिली थी। अब शादी के लिए उसी बेटे को बालिग साबित करना पड़ा। विपक्षी बेटे की उम्र को लेेकर अलग-अलग तथ्यों को आधार बनाने की तैयारी में है। हालांकि परिवार इससे निपटने के लिए तैयार है। कुल मिलाकर शादी गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है।