भाजपा के कद्दावर और नंबर दो के नेता राजनाथ सिंह भी सुबोध के खाते में जीत नहीं डाल सके हैं। राजनाथ सिंह भगवानपुर में परिवर्तन रैली को संबोधित करने पहुंचे थे। चुनाव से पहले उत्तराखंड में परिवर्तन करने के लिए भाजपा की ओर से परिवर्तन यात्राएं और रैलियों का आयोजन किया जा रहा था। रैलियों को केंद्रीय मंत्रियों की ओर से संबोधित किया गया था, इनमें अधिकांश रैलियां कोई खास बड़ी नहीं थी, लेकिन भगवानपुर में भाजपा के सुबोध राकेश की पसंद पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह विशाल रैली को संबोधित करने पहुंचे थे। सिंह के रैली में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचने का मकसद भाजपा की इस कमजोर सीट को मजबूत करना था, जिससे कमजोर सीट पर भी भाजपा का कमल खिलाया जा सके। उन्होंने रैली में पार्टी की ओर से टिकट होने से पहले ही सुबोध राकेश को भाजपा का चेहरा अप्रत्यक्ष रूप से घोषित कर जनता से जिताने की अपील भी की थी, राजनाथ के जाने के बाद सुबोध ने भी चुनाव में काफी मेहनत की थी, लेकिन राजनाथ सिंह भी सुबोध को जीत की खुशी नहीं दे सके हैं।
परिवार ने किया था किनारा, जनता ने दिया सहारा
कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद ममता राकेश से परिवार के लोगों ने किनारा कर लिया था। चुनाव में भी राकेश परिवार के सभी सदस्य सुबोध को जिताने में लगे हुए थे, ममता के साथ केवल उनके पुत्र अभिषेक राकेश एवं दिवंगत मंत्री के खासम-खास रहे समर्थक थे, लेकिन चुनाव में जनता ने सुबोध को नकार कर ममता राकेश पर विश्वास जताते हुए सहारा देने का काम किया है।